वक़्त का पहना उतार आये कुछ लम्हे मरके गुज़ार आये ख़ाबों में सही अपना तो माना दिल को मेरे अपना तो जाना खट्टे-मीठे रिश्ते चख लिये हैं कुछ सच्चे पलकों पे रख लिये हैं ख़ाहिशों का बवण्डर है दिल दिल को उसके द… more →
तख़लीक़-ए-नज़रambuj wrote 11 months ago: कभी पलकों पे आंसू आते हैं तो कभी लब थरथराते हैं, कभी दिल में बेचैनी होती है तो कभी साँसे थम सी जाती … more →
विनय wrote 1 year ago: वक़्त का पहना उतार आये कुछ लम्हे मरके गुज़ार आये ख़ाबों में सही अपना तो माना दिल को मेरे अपना तो जाना … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: ठंडी हवा का एक झोका गुजरा, जैसे मेरा यार मुस्कुराता हुआ गुजरा, दिल मे मेरे एक उदासी सी छाई, तकदीर मु … more →
विनय wrote 1 year ago: राहों में ढूँढ़ता हूँ कभी तुम मिलती नहीं यह भी सही जानो न जानो प्यार क्या है यह इक नशा-सा उतरता नहीं … more →