उस पलाश के नीचे यादों में छिपाकर रखा है वही अकेला पलाश के फूलों का पौधा जो हम दोनो का साथी था जहा हम मिलते दो अजनबी की तरह मुस्कुरालेते,नज़रे मिलाते पर कभी कुछ कह नही पाए दो अनजान मुसाफिरो की तरह बरबस… more →
mehekmehhekk wrote 1 year ago: उस पलाश के नीचे यादों में छिपाकर रखा है वही अकेला पलाश के फूलों का पौधा जो हम दोनो का साथी था जहा हम … more →