एक ख़ामोश अफ़साना जो तुम्हारी नज़रों ने सुनाया है मुझे काश! वह तुम अपने लबों से मेरे लबों पर लिखती कभी, इससे तेरी ज़िन्दगी के कुछ पल मेरे हिस्से तो आ जाते! शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’ लेखन वर्ष: २००४… more →
तख़लीक़-ए-नज़रK.VERMA wrote 2 months ago: अनजाने में छू गया था हाथ तेरा , पल को लगा मिल गया , तेरा । दिल ही तो है इसका क्या करें , न मिलो तो ह … more →
kmuskan wrote 1 year ago: ज़िन्दगी जाने तू क्या चाहती है जाने किस मोड़ पे मुझे लिए जा रही है मेरे खवाबो ,मेरी तम्मनाओ को पीछ … more →
विनय wrote 1 year ago: एक ख़ामोश अफ़साना जो तुम्हारी नज़रों ने सुनाया है मुझे काश! वह तुम अपने लबों से मेरे लबों पर लिखती कभी … more →
kmuskan wrote 1 year ago: ज़िंदगी की भाग-दोड में जाने वो पल कहाँ खो गए जब कुछ पल बैठ कर चैन से बतिया लिया करते थे एक चाए के प्य … more →
kmuskan wrote 1 year ago: अपने ही कंधो पे ,अपनी लाश लिए जा रहे है जाने किस , उम्मीद में जिए जा रहे है जानती हूँ ,तू शामिल नही … more →
kmuskan wrote 1 year ago: दुनिया की भीड़ में खो गए, तुम कहाँ हर पल नज़रे तुम्हे ही ढूंढती है जानती है की तुम नही हो यहाँ, पर फ़ि … more →
kmuskan wrote 1 year ago: उस पल को बीते जमाना हो गया जब हुआ था मेरा तुझसे सामना आज अगर तुम मिल भी जाओ तो हम दो अजनबियों की तरह … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: कल फिर न सो सका तेरी याद में, आज फिर न जाग सका तेरी याद से, इन अश्को ने याद किया हर पल, एक पल भी न र … more →
kmuskan wrote 1 year ago: जी भरकर जी ले इस पल को जाने फिर ये पल हो न हो हर खुशी को समेट ले अपनी बाहों में जाने फिर ये पल हो न … more →
kmuskan wrote 1 year ago: नही खुशियों की कतार मंजूर ,नही रौशनी की सोगात मंजूर क्योंकि आज मेरा चाँद बादलो में छिपा है नही गमो क … more →
Amarjeet Singh wrote 1 year ago: एक पल सुखी एक पल दुखी, दो घड़ी कुछ इस तरह बीत चली, ज़िंदगी जैसे मुझसे रूठ चली, एक पल अपना एक पल पराया … more →
kmuskan wrote 1 year ago: इक पल मे कितना कुछ बदल जाता है पैसा कैसे सब रिश्तो को तोड़ देता है आज जान पाई हूँ पागल थी मैं जो इन र … more →
kmuskan wrote 1 year ago: िकतने अचछे थे बचपन के वो पल ना कोई िचंता, ना कोई काम बेिफकरी का था आलम हर वकत इधर- उधर खूब उधम मचाते … more →
विनय wrote 1 year ago: ज़ियाँ दिल का किया जो तुमसे लगाया तो पल-पल सीने में धड़कता क्या है? तेरी आरज़ू मुझे कहाँ बहा ले जा रही … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: मेरे अश्क़ेनामुराद यूं, निगाह से थे छलक गए चरागेदिल को बुझा गए, ये आज ऐसे चमक गए हमें प्यास थी दीदार … more →
विनय wrote 1 year ago: कोई तुमसे मुलाक़ात का बहाना ढूँढ़ता है फिर से वही गुज़रा हुआ ज़माना ढूँढ़ता है वह एक पल जो थम के रह गया … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: एक पल में ही हज़ारों मुद्दतों की बात हो ज़हन में जो ले रहीं उन करवटों की बात हो आओ बोलें प्यार के इख़ला … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: दिल ये सोचता है किसी पल होगा वो बेवफ़ा भी मेरे लिये बेकल होगा ग़र मेरी आँखों में बरसातें हैं उसके दिल … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: हुस्न पर हर पल नये जमाल रहते हैं चेहरे पे हर मिजाज़ के विसाल रहते हैं मिलने की आरज़ू में और मिलने के ब … more →