तन्हाई में भी हम दोनों साथ हैं यूँ लगता है मानो हाथों में हाथ हैं वह पहली शाम जब देखा था तुम्हें मैं आज तक भूला नहीं हूँ वह पहली झलक’ वह पहली हँसी मैं आज तक भूला नहीं हूँ दूर होकर भी हम-दोनों सा… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: तन्हाई में भी हम दोनों साथ हैं यूँ लगता है मानो हाथों में हाथ हैं वह पहली शाम जब देखा था तुम्हें मैं … more →