दो लफ़्ज़ों में बयाँ कर सकते थे हम अपने दिल की बात गुज़र गये वह सारे लम्हे बिताये थे जो हमने साथ पास तो बहुत थे वह फिर भी न कर पाये दिल की बात वह दिन थे कितने हसीं जब गुज़र रही थी उजालों से रात दो लफ़्ज़ों … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: दो लफ़्ज़ों में बयाँ कर सकते थे हम अपने दिल की बात गुज़र गये वह सारे लम्हे बिताये थे जो हमने साथ पास तो … more →