नया हुनर पाने का वक़्त आया है उस को भुलाने का वक़्त आया है आओ बुझा दें पुरानी शम्मों को नई शम्में जलाने का वक़्त आया है क़ैद-ए-ज़ुल्फ़ से रिहा होकर परिंदे के उड़ जाने का वक़्त आया है आँखों ने छुपा रखी थी अब त… more →
इक शायर अंजाना सा...Nidhi KM wrote 4 months ago: तुमसे ज़्यादा और ज़्यादा पाने की और तुम्हे देने ख़्वाहिश है तुम्हारी बाहों मे जीने और मरने की ख़्वाह … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: नया हुनर पाने का वक़्त आया है उस को भुलाने का वक़्त आया है आओ बुझा दें पुरानी शम्मों को नई शम्में जलान … more →