Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: पूंजीपतियों के चाटुकार बुद्धिजीवियों द्वारा जानबूझकर परंतु कुछ पढ़े-लिखे लोगों द्वारा अनजाने में भावु … more →
prithvi wrote 5 months ago: उस संदूक को कई दिनों से खोला नहीं था. आज सुबह सुबह पता नहीं क्यूं अचानक कैसे उसके पास पहुंच और कपड़ … more →
dipankargiri wrote 1 year ago: सपने हर किसी को नहीं आते बेजान बारूद के कणों में सोयी आग को सपने नहीं आते बदी के लिए उठी हुई हथेली प … more →
dipankargiri wrote 1 year ago: मैं सलाम करता हूं आदमी के मेहनत में लगे रहने को मैं सलाम करता हूं आने वाले खुशगवार मौसमों को मुसीब … more →
PRIYANKAR wrote 1 year ago: पाश की एक बहुचर्चित कविता सबसे ख़तरनाक मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नहीं होती पुलिस की मार सबसे ख़त … more →