ध्रुवदेव मिश्र ‘पाषाण’ न सही कविता अगर यह फतवा सही है कि धरती पर न कहीं पानी है न कहीं प्यार तो कैसे लहरा रहे हैं सात-सात सागर कैसे बचाये रखते हैं भूख-प्यास के बावजूद आंखों की चमक माताओं के इर्… more →
अनहद नादPRIYANKAR wrote 1 year ago: ध्रुवदेव मिश्र ‘पाषाण’ न सही कविता अगर यह फतवा सही है कि धरती पर न कहीं पानी है न कहीं प्यार तो … more →
PRIYANKAR wrote 1 year ago: ध्रुवदेव मिश्र ‘पाषाण’ ॥१॥ विडंबना अपने बैकुंठ की रक्षा में हमारे इर्द-गिर्द रोज़- … more →