ज़रा पास ना आओ मुझे क़रार आ जाये ज़रा लटों को उलझाओ मुझे क़रार आ जाये ढ़क लो ज़रा आँचल, कर लो थोड़ा परदा ज़रा खुल के शरमाओ मुझे क़रार आ जाये कुछ दूर बैठो तुम, करने दो तमन्ना ज़रा ख़लिश को बढ़ाओ मुझे क़रार आ जाये श… more →
इक शायर अंजाना सा...deveshsharma wrote 9 months ago: मैं उससे रशक़ करता हूँ. क्यूंकी वो मुझसे ज़्यादा अच्छा लिखता है ऐसा क्यूँ है मैं नहीं जानता शायद तू … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़रा पास ना आओ मुझे क़रार आ जाये ज़रा लटों को उलझाओ मुझे क़रार आ जाये ढ़क लो ज़रा आँचल, कर लो थोड़ा परदा ज़र … more →
विनय wrote 1 year ago: शीशाए-अश्क आते रहे क़तरा-क़तरा लहू रुलाते रहे हम दीवानों की ख़ैर भला कौन पूछे लोग आते-जाते रहे हम रखते … more →