यह यादें तो ऐसी हैं जैसे मेरी परछाईं जब तक अंधेरे में चलते रहे तब तक हम दोनों साथ नहीं जहाँ उजालों की ओर मुड़े फिर से मेरे दिल पर आयीं यह यादें वह तो नहीं जिनको काग़ज़ पर लिखकर मिटा दें यह वह लम्हे तो न… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: यह यादें तो ऐसी हैं जैसे मेरी परछाईं जब तक अंधेरे में चलते रहे तब तक हम दोनों साथ नहीं जहाँ उजालों क … more →