क़तरा क़तरा पिघल रहा हूँ तेरी आँच में मै जल रहा हूँ सहमा सहमा और धीरे धीरे बर्फ़ की मानिंद गल रहा हूँ अब चलना सीखा है थोड़ा थोड़ा लगी थी ठोकर, संभल रहा हूँ तू साथ आये तो बात क्या हो अभी तो तन्हा ही चल रहा … more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: क़तरा क़तरा पिघल रहा हूँ तेरी आँच में मै जल रहा हूँ सहमा सहमा और धीरे धीरे बर्फ़ की मानिंद गल रहा हूँ अ … more →