हमेशा ही तो नही होता काम कभी थक जाता है इंसान रुक जाते हैं हाँथ दिमाग हो जाता है शांत कभी तो कलाकार भी दर्शक बनना चाहता है लड़की माँ बनना चाहती है लड़का पिता बनना चाहता है बड़े बूढे खेलना चाहते है बच्… more →
मेरी भाषा और .....Nidhi KM wrote 1 month ago: दीपावली की रात… एक घर मे… छोटी-छोटी बेटियाँ, माँ का हाथ बटा रही है, घर मे रंग-रोगन कर, प … more →
Satish Chandra satyarthi wrote 8 months ago: सुदामा प्रसाद पाण्डेय “धूमिल” की एक और कविता आपके साथ शेयर करना चाहता हूँ। पता नहीं क्यो … more →
Praful wrote 9 months ago: पाकिस्तान इस वक़्त जिस आतकंवाद की लहर का शिकार है उसके मद्देनज़र लौंग मार्च और धरने पर आतुर राजनीतिज … more →
माधव त्रिपाठी wrote 1 year ago: हमेशा ही तो नही होता काम कभी थक जाता है इंसान रुक जाते हैं हाँथ दिमाग हो जाता है शांत कभी तो कलाकार … more →