जब आसमाँ पे यह हिलाल आया मुझे याद तुमसे विसाल आया जिस शब तारों की बारात आयी मुझे तुम्हारा ही ख़्याल आया हमने कितने सवाब हैं कमाये जो मेरे हिस्से यह जमाल आया नाज़ करना ख़ुद पे फ़ितरत है उम्र पे यह कैसा स… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: जब आसमाँ पे यह हिलाल आया मुझे याद तुमसे विसाल आया जिस शब तारों की बारात आयी मुझे तुम्हारा ही ख़्याल … more →