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Blogs about: पुरवाई

शाम गहरी हो रही थी

विनय wrote 2 years ago: शाम गहरी हो रही थी सुनहरा चाँद बादलों से झाँक रहा था छत पे था मैं और पुरवाई बह रही थी तेरा ख़्याल और … more →

Tags: मेरी नज़्म, चाँद, इश्क़, Love, light, तन्हाई, मौसम, प्यार, बादल