दिल मेरे दिल तू इतना नादान क्यों है टूटे हुए ख़्वाबों में ये अरमान क्यों है बिखरे जाते हैं क्यों मरासिम सारे अब मुँह फेरे हर इन्सान क्यों है घेर चुका ही है अब ये मुझको फिर इतना चुप ये तूफ़ान क्यों है … more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 4 months ago: दिल मेरे दिल तू इतना नादान क्यों है टूटे हुए ख़्वाबों में ये अरमान क्यों है बिखरे जाते हैं क्यों मरा … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: क्यों सब की ज़ुबाँ पे शिकायत का रंग है इन्सान की ये कौन सी आदत का रंग है लड़ते हो ख़ुदाओं के मज़हबों की … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: हर ज़ुबाँ से आता हुआ अल्फ़ाज़ जुदा है सब ही की रवायतों का अंदाज़ जुदा है मुफ़लिसी हर आँख में किसी ना किसी … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: This is a poem I wrote for my Ma on her Birthday. She cried reading it just the way I had cried whil … more →