चाह नहीं मैं सुरबाला के गहनों में गूंथा जाऊँ, चाह नहीं प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ, चाह नहीं, सम्राटों के शव पर, है हरि, डाला जाऊँ चाह नहीं, देवों के शिर पर, चढ़ूँ भाग्य पर इठलाऊँ! मु… more →
अभ्युदयKrishna Kumar Mishra wrote 2 weeks ago: ्मैनहन का जंगली पुष्प जो एक देश का राष्ट्रीय पुष्प भी है सन १९८२ के आस पास का मसला है, मैं अक्सर मैन … more →
kuldeepsingh wrote 1 year ago: चाह नहीं मैं सुरबाला के गहनों में गूंथा जाऊँ, चाह नहीं प्रेमी-माला में बिंध प्यारी को ललचाऊँ, … more →