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श्रम और पूंजी की टक्कर - एक ऐसा 'वैषम्य' जिसका निपटारा बल प्रयोग द्वारा ही होता है 2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 4 weeks ago: श्री दिनेशराय द्विवेदी जी द्वारा लिखित आलेख ‘उद्यम भी श्रम ही है‘ और श्री ज्ञानदत्त जी … more →

Tags: उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, पूंजीवादी संकट, मार्क्सवाद, युद्ध, संघर्ष, सर्वहारा, Marxism, अधिशेष

पूंजीवाद के खिलाफ मेहनतकश वर्ग के प्रतिरोध के विभिन्न रूप

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 1 month ago: 23.  ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां पूंजीवादी समाज मेहनतकशों … more →

Tags: उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, एंगेल्स, कम्युनिस्ट, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, विरासत, सर्वहारा

मजदूर पूंजीपति को उधार देता है1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: 21.  ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां “ऐसे प्रत्येक देश … more →

Tags: उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, एंगेल्स, कम्युनिस्ट, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, विरासत, कम्युनिस्ट पार्टी क

मैन्युफैक्चर और बड़े पैमाने के उत्पादन (मशीनोफैक्चर) की कालावधियों में श्रम विभाजन

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: 17. ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां दस्तकार किसी वस्तु के एक … more →

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सर्वहारा वर्ग का ऐतिहासिक विकास 1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: 16. ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां वर्तमान समय में ‘सर … more →

Tags: कम्युनिस्ट, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, साम्राज्यवाद, विरासत, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, एंगेल्स

संकटों के सिद्धांत और इतिहास के बारे में कुछ बातें1 comment

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: ‘कम्युनिस्ट मेनिफेस्टो’ पर डेविड रियाजानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां अंग्रेज़ मेहनतकश … more →

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डेविड रियाज़ानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: 14. पूंजीवाद और प्रकृति पर मनुष्य की विजय सन 1848 तक प्रकृति पर मनुष्य की विजय का काम बहुत धीमी ग … more →

Tags: कम्युनिस्ट, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, साम्राज्यवाद, विरासत, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, एंगेल्स

मार्क्स-एंगेल्स द्वारा लिखित ‘कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणापत्र’ पर डेविड रियाज़ानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां/बुर्जुआ और सर्वहारा-10. विश्व बाज़ार का मात्रात्मक और गुणात्मक विकास

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: 10. विश्व बाज़ार का मात्रात्मक और गुणात्मक विकास “मशीनों के आविष्कार के पहले प्रत्येक देश … more →

Tags: कम्युनिस्ट, मार्क्सवाद, उत्पादक शक्तियां, Marxism, एंगेल्स, पुस्तकों सबंधी जानक, कार्ल मार्क्स, मजदूर वर्ग की विरासत, Karl Marx

मार्क्स-एंगेल्स द्वारा लिखित ‘कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणापत्र’ पर डेविड रियाज़ानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां/बुर्जुआ और सर्वहारा-8. पूंजीवाद का क्रांतिकारी चरित्र व 9. पुरे विश्व में पूंजीवाद का विस्तार

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 2 months ago: 8. पूंजीवाद का क्रांतिकारी चरित्र “जब तक हस्तशिल्प और मैन्युफैक्चर सामाजिक उत्पादन के सामान् … more →

Tags: क्रांति, कम्युनिस्ट, समाजवाद, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध

मार्क्स-एंगेल्स द्वारा लिखित 'कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणापत्र' पर डेविड रियाज़ानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां/बुर्जुआ और सर्वहारा-6. बुर्जुआ वर्ग का राजनितिक विकास

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 3 months ago: 6. बुर्जुआ वर्ग का राजनितिक विकास यहाँ पर लेखकों का मंतव्य सर्वप्रथम और प्रमुख रूप से फ्रांसीसी बु … more →

Tags: क्रांति, आंदोलन, कम्युनिस्ट, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, विरासत, उत्पादक शक्तियां

मार्क्स-एंगेल्स द्वारा लिखित 'कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणापत्र' पर डेविड रियाज़ानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां/बुर्जुआ और सर्वहारा-5. औद्योगिक क्रांति और मशीन से उत्पादन का विकास

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 3 months ago: 5. औद्योगिक क्रांति और मशीन से उत्पादन का विकास अठारहवीं शताब्दी के अंत में नयी मशीनों के आविष्कार … more →

Tags: क्रांति, कम्युनिस्ट, समाजवाद, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, विरासत, उत्पादक शक्तियां

मार्क्स-एंगेल्स द्वारा लिखित 'कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणापत्र' पर डेविड रियाज़ानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां/बुर्जुआ और सर्वहारा-4. मैन्युफैक्चर

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 3 months ago: ['कम्यूनिस्ट घोषणापत्र' पर राजनीतिशास्त्र के कई विद्वानों ने व्याख्याएँ और टिप्पणियां लिखी हैं. इनम … more →

Tags: क्रांति, कम्युनिस्ट, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, विरासत, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध

मार्क्स-एंगेल्स द्वारा लिखित 'कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणापत्र' पर डेविड रियाज़ानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां/बुर्जुआ और सर्वहारा-3. मध्ययुगीन अर्थव्यवस्था का ह्नास, भूगोलिक खोजों का युग और विश्व-बाज़ार की शुरुआत

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 3 months ago: 3. मध्ययुगीन अर्थव्यवस्था का ह्नास, भूगोलिक खोजों का युग और विश्व-बाज़ार की शुरुआत पंद्रहवीं शताब्दी … more →

Tags: कम्युनिस्ट, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, विरासत, उत्पादक शक्तियां, उत्पादन के संबंध, Communist

मार्क्स-एंगेल्स द्वारा लिखित 'कम्युनिस्ट पार्टी का घोषणापत्र' पर डेविड रियाज़ानोव की व्याख्यात्मक टिप्पणियां/बुर्जुआ और सर्वहारा-2. हेक्स्टहाउज़ेन, मॉरेर और मॉर्गन

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 3 months ago: 2. हेक्स्टहाउज़ेन, मॉरेर और मॉर्गन कम्युनिस्ट पार्टी के घोषणापत्र के बाद के संस्करणों में एंगेल्स (1 … more →

Tags: क्रांति, कम्युनिस्ट, समाजवाद, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, मार्क्सवाद, विरासत, उत्पादक शक्तियां

नन्दन नीलेकणी की किताब के बहाने एक बार फिर उजागर हुई पूँजीपतियों की सोच

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 3 months ago: पूँजीपति के लिए मज़दूर सिर्फ मुनाफा पैदा करने का एक साधन है! भारत सिर्फ अपने विशाल बाजार की वजह से … more →

Tags: पूंजीवादी संकट, मध्यवर्ग का ऊपरी तबक, मार्क्सवाद, शोषण-उत्पीड़न, सर्वहारा, इमेजनिंग इण्डिया, नंदन नीलेकणी, पूँजी का तर्क, पूँजीपति वर्ग के नवद

शोलोखोव के नावल 'धीरे बहे दोन रे' पर आधारित बनी महाकाव्यात्मक रुसी फ़िल्म के डाउनलोड लिंक्स 2 comments

Shaheed Bhagat Singh Vichar Manch, Santnagar wrote 4 months ago: शोलोखोव के नावल के इसी शीर्षक पर आधारित बनी इस लगभग साढ़े पॉँच घंटे की महाकाव्यात्मक फ़िल्म में मध् … more →

Tags: क्रांति, समाजवाद, सर्वहारा, नव सर्वहारा पुनर्जा, नव सर्वहारा प्रबोधन, युद्ध, विरासत, पुस्तकों सबंधी जानक, सोवियत यूनियन की फिल

वर्गीय समाज में औरत की दशा

नौभास wrote 10 months ago: परिवार को बचाने के करुण क्रंदन के खिलाफ एक पत्र : कात्यायनी प्रिय भाई, ‘बचा रहे परिवार! … more →

Tags: पुस्तकों सबंधी जानक, आधी दुनिया

वर्गीय समाज में औरत की दशा

विचार मंच, wrote 10 months ago: परिवार को बचाने के करुण क्रंदन के खिलाफ एक पत्र : कात्यायनी प्रिय भाई, ‘बचा रहे परिवार! … more →

Tags: पुस्तकों सबंधी जानक

राजनीति के ’पिंजर’ में फंसा लोकतंत्र2 comments

जगदीश भाटिया wrote 1 year ago: अमृता प्रीतम का उपन्यास ’पिंजर’ मैंने  तब  पढ़ा था पहली बार जब में स्कूल में ही था। उसके बाद जाने कित … more →

Tags: कहानी, देश, पंजाबी, फिल्म, राजनीति, वैचारिक, समाज, India, Politics


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