तीन कविताएं(१) मेरी आंखों में उमडते हुए समंदर की हरएक बुंद में तेरी तस्वीर बंद है . तेरी हरएक तस्वीर को मैं झांका करता हूं चोरी-चोरी, चूपके-चूपके । मेरे होठों पर कई दिनों से तितली बैठने नहीं आयी । मेर… more →
विजयकुमार दवे / Vijaykumar Davevijaykumardave wrote 1 year ago: तीन कविताएं(१) मेरी आंखों में उमडते हुए समंदर की हरएक बुंद में तेरी तस्वीर बंद है . तेरी हरएक तस्वीर … more →