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चेहरों पे चेहरा8 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: सेहर है या कोई सहरा है लोगों सभी बातों पे क्यों पहरा है लोगों जहां कश्ती मेरी आकर रुकी है समन्दर और … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Aug 2008, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit, jain

रास्तों पे सब ही पहचाने से लोग हैं4 comments

Rohit Jain wrote 1 year ago: रास्तों पे सब ही पहचाने से लोग हैं देखो करीब से तो अंजाने से लोग हैं दिल में झांकोगे तो बस तन्हाईयां … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Sep 2007, ही, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

हम भी जिगर पे इख़्तियार रख लेंगे1 comment

Rohit Jain wrote 1 year ago: हम भी जिगर पे इख़्तियार रख लेंगे बंद आँखों में छुपा के प्यार रख लेंगे एक पल क्या है तू जो कह दे तो तम … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Feb 2008, एक, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit

ज़मीं पे पैर रखो आसमान हो जाओ

Rohit Jain wrote 1 year ago: ज़मीं पे पैर रखो आसमान हो जाओ जिसे दोहराये जहां दास्तान हो जाओ बेखबरी के आलम से मुल्क लरज़ाया सा है टि … more →

Tags: मेरी गज़लें, 2008 A Poetic Journey, Feb 2008, हो, रोहित, जैन, गज़ल, कविता, Rohit


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