जब से मैने वो हँसी सा पैकर देखा है झूमता गाता हुआ हर मंज़र देख है राह में मिलनेवालों से लेते हैं अपनी ही खबर भूले अपना घर जब से उसका घर देख है फूलों में भी अब देखो इक नई सी रंगत आई है बागों ने भी शायद … more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: जब से मैने वो हँसी सा पैकर देखा है झूमता गाता हुआ हर मंज़र देख है राह में मिलनेवालों से लेते हैं अपनी … more →