अंधेरे हैं भागे प्रहर हो चली है। परिंदों को उसकी ख़बर हो चली है। सुहाना समाँ है हँसी है ये मंज़र। ये मीठी सुहानी सहर हो चली है। कटी रात के कुछ ख़यालों में अब ये। जो इठलाती कैसी लहर हो चली है।… more →
रज़िया "राज़""रज़िया" wrote 1 year ago: अंधेरे हैं भागे प्रहर हो चली है। परिंदों को उसकी ख़बर हो चली है। सुहाना समाँ है हँसी है ये … more →
"रज़िया" wrote 1 year ago: आया मौसम बड़ा ही सुहाना।(2) ले के आया है कोई ख़ज़ाना।…आया मौस … more →
"रज़िया" wrote 1 year ago: कारवॉ मेरे पंख मुज़से न छीनलो, मुझे आसमॉ की तलाश है। मैं हवा हूँ मुझको न बॉधलो , मुझे ये … more →