premlatapandey wrote 2 months ago: प्रकृति भगवान है। … more →
प्रेमलता पांडे wrote 2 months ago: फोटो खींचना मुझे बहुत अच्छा लगता है। फोटोग्राफ़ी की विधिवत शिक्षा के नाम पर किसी से कोई पाठ नहीं पढ़ा … more →
premlatapandey wrote 2 months ago: कुदरत के रंग निराले हैं। कर देते मतवाले हैं। … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 8 months ago: रजनी जग को सुलाये सहे तिमिर का वार नभ खुश हो पहनाये चांद-तारों का हार बन के खुद आइना रहा रूप को निखा … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 10 months ago: केवल उंगलियां देख कर घबराती ग्वालिन देख रही अपनी ’मौसी’ का चेहरा - आग-बबूला पहाड़ से लुढ़कते पत्त्थर स … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: प्रकृति के अदभुत दृश्य मन में एक अलग सी अनुभुति कराते हैं कि बस मन बाबला हो जाता है। क्या दूर और … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कल पर्यावरण दिवस था। शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति मिला हो जिसे पर्यावरण बचाने की चिंता हो। इसका कारण भी ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मनुष्य की अपने स्थान से दूसरी जगह पलायन करना एक स्वाभाविक प्राकृतिक प्रक्रिया है और इसे रोकना लगभग अ … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: रजनी जग को सुलाये सहे तिमिर का वार नभ खुश हो पहनाये चांद-तारों का हार बन के खुद आइना रहा रूप को निखा … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: प्रेम पाशमय जीवन सुना कर जाने के बाद महक उठी नन्हीं बगिया में प्रिये तुम्हारी याद झिलमिल स्मृति च … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: अगर एक अखबार की खबर पर यकीन करें तो आगे चलकर प्रकृति को निहारने के लिए भी पैसे देने पड़ेंगे. इस मामले … more →
Shastri JC Philip wrote 2 years ago: फॉटो ब्लॉग: प्रकृति !Photo Blog: Nature ! आप इस चित्र का उपयोग रचनात्मक सामान्य प्रत … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: मोम की कसक जो दर्द बन गई पिघलपिघल लौ से दूर हो गया आंसुओं की गर्मी से कराह कर खण्ड मे बंटा तो चूर हो … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: पौ फटी नभ लाल हो कर सूर्य से शरमा रहा चांद गर्वित रूप था कल मेरे आगे कुछ नहीं लजाती दुल्हन से पूछो म … more →