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Blogs about: प्रकृति

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कुदरत तेरे रुप अनेक १०

premlatapandey wrote 2 months ago: प्रकृति भगवान है। … more →

Tags: चित्राभिव्यक्ति

जो मैंने देखा3 comments

प्रेमलता पांडे wrote 2 months ago: फोटो खींचना मुझे बहुत अच्छा लगता है। फोटोग्राफ़ी की विधिवत शिक्षा के नाम पर किसी से कोई पाठ नहीं पढ़ा … more →

Tags: चित्राकंन, फोटो

कुदरत तेरे रुप अनेक (४)2 comments

premlatapandey wrote 2 months ago: कुदरत के रंग निराले हैं। कर देते मतवाले हैं। … more →

Tags: चित्राभिव्यक्ति, कुदरत के रंग

प्यार गंगा की धार1 comment

Harihar Jha हरिहर झा wrote 8 months ago: रजनी जग को सुलाये सहे तिमिर का वार नभ खुश हो पहनाये चांद-तारों का हार बन के खुद आइना रहा रूप को निखा … more →

Tags: काव्यालय, गीत, काम, गंगा, प्यार, मां, रजनी

चिड़चिड़ी

Harihar Jha हरिहर झा wrote 10 months ago: केवल उंगलियां देख कर घबराती ग्वालिन देख रही अपनी ’मौसी’ का चेहरा - आग-बबूला पहाड़ से लुढ़कते पत्त्थर स … more →

Tags: अतुकांत, हिन्द-युग्म, पर्यावरण, मौसी, विकास, व्यंग्य

ईश्वर प्राप्ति - परमानंद!!!4 comments

प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago:     प्रकृति के अदभुत दृश्य मन में एक अलग सी अनुभुति कराते हैं कि बस मन बाबला हो जाता है। क्या दूर और … more →

Tags: चित्राकंन, परमानंद, अदभुत दृश्य

पर्यावरण पर क्या लिखता-व्यंग्य1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कल पर्यावरण दिवस था। शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति मिला हो जिसे पर्यावरण बचाने की चिंता हो। इसका कारण भी ह … more →

Tags: writing, vyangya, inglish, संपादकीय, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India, भारत

एक संदर्भहीन आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मनुष्य की अपने स्थान से दूसरी जगह पलायन करना एक स्वाभाविक प्राकृतिक प्रक्रिया है और इसे रोकना लगभग अ … more →

Tags: Blogroll, संपादकीय, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, चिन्तन, आलेख, साहित्य, हिंदी साहित्य, knowledge

प्यार गंगा की धार2 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: रजनी जग को सुलाये सहे तिमिर का वार नभ खुश हो पहनाये चांद-तारों का हार बन के खुद आइना रहा रूप को निखा … more →

Tags: गीत, काव्यालय, प्यार, गंगा, रजनी, मां, काम

प्रिये तुम्हारी याद5 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: प्रेम पाशमय जीवन सुना कर जाने के बाद महक उठी नन्हीं बगिया में प्रिये तुम्हारी याद    झिलमिल स्मृति च … more →

Tags: गीत, अनुभूति, प्रेम, याद

जब फूलों को देखने के लिए पैसे देने होंगे

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: अगर एक अखबार की खबर पर यकीन करें तो आगे चलकर प्रकृति को निहारने के लिए भी पैसे देने पड़ेंगे. इस मामले … more →

Tags: Blogroll, writing, Dashboard, aastha, संपादकीय, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, बिंब-प्रतिबिंब, हास्य व्यंग्य

फॉटो ब्लॉग: प्रकृति !

Shastri JC Philip wrote 2 years ago: फॉटो ब्लॉग: प्रकृति !Photo Blog:  Nature ! आप इस चित्र का उपयोग रचनात्मक सामान्य प्रत … more →

प्यार की उमंग7 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: मोम की कसक जो दर्द बन गई पिघलपिघल लौ से दूर हो गया आंसुओं की गर्मी से कराह कर खण्ड मे बंटा तो चूर हो … more →

Tags: गीत, तुकान्त

शरमा रहा4 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: पौ फटी नभ लाल हो कर सूर्य से शरमा रहा चांद गर्वित रूप था कल मेरे आगे कुछ नहीं लजाती दुल्हन से पूछो म … more →

Tags: तुकान्त, शरमाना


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