Blogs about: प्रकृति

Featured Blog

कनैल: वनस्पति, पौधा, लता, वृक्ष - 2

Girijesh Rao wrote 1 week ago: पौधा है : कनैल , वैज्ञानिक (Botanical) नाम: Thevetia neriifolia, अन्य नाम – अश्वमारक,कर्वीर(सं … more →

Tags: देहाती, पौधे, वनस्पति, समाज, Nature, कनैल, नारी विमर्श, पेंड़, सर्वहारा

बरियार: वनस्पति, पौधा, लता, वृक्ष - 12 comments

Girijesh Rao wrote 3 weeks ago: आप लोगों ने सम्भवत: देखा होगा, मेरे प्रोफाइल का फोटो बदलता रहता है। आज एक वनस्पति तो कल दूसरा पौधा। … more →

Tags: पौधे, वनस्पति, समाज, Nature, जंगली मेंहदी, जिउतिया, जीवित्पुत्रिका, तप, देहात

प्यार गंगा की धार1 comment

Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 months ago: रजनी जग को सुलाये सहे तिमिर का वार नभ खुश हो पहनाये चांद-तारों का हार बन के खुद आइना रहा रूप को निखा … more →

Tags: काव्यालय, गीत, काम, गंगा, प्यार, मां, रजनी

ईश्वर प्राप्ति - परमानंद!!!4 comments

प्रेमलता पांडे wrote 9 months ago:     प्रकृति के अदभुत दृश्य मन में एक अलग सी अनुभुति कराते हैं कि बस मन बाबला हो जाता है। क्या दूर … more →

Tags: चित्राकंन, परमानंद, अदभुत दृश्य

पर्यावरण पर क्या लिखता-व्यंग्य1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कल पर्यावरण दिवस था। शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति मिला हो जिसे पर्यावरण बचाने की चिंता हो। इसका कारण भी … more →

Tags: writing, vyangya, inglish, संपादकीय, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India, भारत

एक संदर्भहीन आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मनुष्य की अपने स्थान से दूसरी जगह पलायन करना एक स्वाभाविक प्राकृतिक प्रक्रिया है और इसे रोकना लगभ … more →

Tags: Blogroll, संपादकीय, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, चिन्तन, आलेख, साहित्य, हिंदी साहित्य, knowledge

प्यार गंगा की धार2 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: रजनी जग को सुलाये सहे तिमिर का वार नभ खुश हो पहनाये चांद-तारों का हार बन के खुद आइना रहा रूप को निखा … more →

Tags: गीत, काव्यालय, प्यार, गंगा, रजनी, मां, काम

प्रिये तुम्हारी याद5 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: प्रेम पाशमय जीवन सुना कर जाने के बाद महक उठी नन्हीं बगिया में प्रिये तुम्हारी याद    झिलमिल स्मृति च … more →

Tags: गीत, अनुभूति, प्रेम, याद

जब फूलों को देखने के लिए पैसे देने होंगे

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अगर एक अखबार की खबर पर यकीन करें तो आगे चलकर प्रकृति को निहारने के लिए भी पैसे देने पड़ेंगे. … more →

Tags: Blogroll, writing, Dashboard, aastha, संपादकीय, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, बिंब-प्रतिबिंब, हास्य व्यंग्य

फॉटो ब्लॉग: प्रकृति !

Shastri JC Philip wrote 1 year ago: फॉटो ब्लॉग: प्रकृति !Photo Blog:  Nature ! आप इस चित्र का उपयोग रचनात्मक सामान्य प् … more →

प्यार की उमंग7 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: मोम की कसक जो दर्द बन गई पिघलपिघल लौ से दूर हो गया आंसुओं की गर्मी से कराह कर खण्ड मे बंटा तो चूर हो … more →

Tags: गीत, तुकान्त

शरमा रहा4 comments

Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: पौ फटी नभ लाल हो कर सूर्य से शरमा रहा चांद गर्वित रूप था कल मेरे आगे कुछ नहीं लजाती दुल्हन से पूछो … more →

Tags: तुकान्त, शरमाना


Have your say. Start a blog.

See our free features →

Related Tags
All →

Follow this tag via RSS

Find other items tagged with “प्रकृति”:
Technorati Del.icio.us IceRocket