मन से कहां रहीम प्रभु, दृग सों कहां दीवान देखि दृगन जो आदरै, मन तोहि हाथ बिकान कविवर रहीम कहते हैं कि मन जैसा कहां स्वामी और कहां किले जैसा अभेद्य दीवान! जो चतुर व्यक्ति उस किले जैसा दीवान का आदर करता… more →
दीपक भारतदीप की शब्दलेख-पत्रिकायोगेन्द्र जोशी wrote 1 year ago: मैंने पहले कभी (31 अक्टूबर) महर्षि बाल्मीकिविरचित रामायण में उल्लिखित राम-जाबालि संवाद की चर्चा की थ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मन से कहां रहीम प्रभु, दृग सों कहां दीवान देखि दृगन जो आदरै, मन तोहि हाथ बिकान कविवर रहीम कहते हैं क … more →