Blogs about: प्रतिबिंब
मरी संवेदना का व्यापार जारी है
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: संवेदना मर गयी है फिर भी उसका व्यापार … more »
संत कबीर वाणी: पराई स्त्री से प्रेम करना लहसुन खाने के समान
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दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: पर नारी का राचना, ज्यूं लहसुन की खान को … more »
जिंदगी के सौदागर
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: चंद किताबें पढ़कर वह दुनियाँ को मुट्ठ … more »
ब्लोग लेखक और लेखक ब्लोगर (२)
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दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: जब मैं अपने सभी ब्लोग पर पाठकों की संख … more »
शब्द और अंतर्मन
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: जब हृदय के भाव शब्द बन जाते तब ऐक तस्वी … more »
अपनी पहचान ढूंढता आदमी
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: अलग खडा नहीं रह सकता इसलिये भीड़ में श … more »
दिल और दोस्ती
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दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: हमें पूछा था अपने दिल को बहलाने के लिए … more »
दिल का क्या हिसाब रखते
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: जिस राह से गुजरे हम वहीं हमसफ़र मिलते ग … more »
कार और साईकिल की टक्कर
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दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: वह साइकिल पर अपने एक तरफ गैस का छोटा सि … more »
मनुस्मृति:दुस्साहसी को क्षमा राज्य के लिए ख़तरा
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: १.अपनी क्षीण वृति, अर्थात आय की कमी से त … more »
सच को बैसाखियों की जरूरत नहीं-हास्य कविता
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: पत्थरों पर लिखी इबारत भी इतिहास का सच … more »
क्रिकेट में संयत व्यवहार रखना आवश्यक
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दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: भारत और आस्ट्रेलिया की बीच हाल ही मे … more »
चाणक्य नीति:विवशता में करते हैं भक्ति का नाटक
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दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: 1.भंवर जब तक कमल दल के बीच रहता है तो … more »
विवाद से बचने के लिए व्यंजना विधा में लिखें
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दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: हिंदी भाषा में लिखने की तीय विधाएं है … more »
अपनी आभा खोते हुए समाचार चैनल
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: हम भारत के लोग मूलत: सीधे होते हैं इस … more »
शाश्वत प्रेम के कितने रुप
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: ‘प्रेम’ शब्द मूलरूप से संस्कृत के … more »
चाणक्य नीति:मन की अग्नि अधिक कष्टकारी
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: 1.ऐसा व्यक्ति अविश्वसनीय होता है ज … more »
संत कबीर वाणी:भक्त में अहंकार नहीं होता
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: जब लग नाता जाति का, तब लग भक्ति न होय ना … more »
अपने ही लोगों की वाह-वाही चाहिए
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: लिपि रोमन हो गयी है कॉमन अब इस दुनिया क … more »
