प्राण शर्मा जी की एक ग़ज़लः चूल्हा-चौका, कपड़ा-लत्ता ख़ौफ़ है इनके बहने का तूफ़ानों का ख़ौफ़ नहीं है ख़ौफ़ है घर के ढहने का सब से प्यारा, सब से न्यारा जीवन मुझ को क्यों न लगे शायद ही कोई सानी है दुनि… more →
मंथनमहावीर wrote 6 months ago: प्राण शर्मा जी की एक ग़ज़लः चूल्हा-चौका, कपड़ा-लत्ता ख़ौफ़ है इनके बहने का तूफ़ानों का ख़ौफ़ नहीं ह … more →
महावीर wrote 7 months ago: प्राण शर्मा जी की एक ग़ज़लः परखचे अपने उड़ाना दोस्तो आसां नहीं आपबीती को सुनाना दोस्तो आसां नहीं … more →
महावीर wrote 8 months ago: प्राण शर्मा जी की दो ग़ज़लें यारों से मुंह को मोड़ना कुछ तो ख़याल कर बरसों की यारी तोड़ना कुछ तो … more →
महावीर wrote 9 months ago: प्राण शर्मा जी की दो रचनाएं : प्राण शर्मा जी की रचनाएं पढ़ते हुए ऐसा लगने लगता है जैसे रचनाएं बोल … more →
महावीर wrote 11 months ago: देवी नागरानी एक संवेदन शील कवियित्री -प्राण शर्मा ‘प्रतिभाशाली और श्रेष्ट कवि कौन है?’ … more →
महावीर wrote 11 months ago: मुशायरा/कवि-सम्मेलन “बरखा-बहार” भाग 2 सूचनाः देखने वालों के अनुरोध पर ‘मुशायरे क … more →
महावीर wrote 1 year ago: ग़ज़ल – हादसों के शहर में सो रहा था चैन से मैं फ़ुर्सतों के शहर में जब जगा तो ख़ुद को पाया हा … more →
महावीर wrote 1 year ago: उषा राजे सक्सेना – एक संवेदनशील कहानीकार नेहरू सैंटर, लंदन में ३० मई २००८ उषा राजे सक्सेना की … more →
महावीर wrote 1 year ago: मेरे दुखों में मुझ पे ये अहसान कर गए कुछ लोग मशवरों से मेरी झोली भर गए पुरवाईयों में कुछ इधर और कुछ … more →