प्रकृति एवं अस्तित्व की व्यवस्थाः प्राथना की आंख से देखिए इस पर एक लधु कहानी याद आती है। एक शिव मन्दिर का श्रद्धालु पुजारी रोज मन से प्रार्थना करता था। गाँव में एक दिन बाढ़ आई।सबसे पहले मन्दिर का चैकी… more →
उठो! जागो!jayantijain wrote 1 week ago: प्रकृति एवं अस्तित्व की व्यवस्थाः प्राथना की आंख से देखिए इस पर एक लधु कहानी याद आती है। एक शिव मन्द … more →
balramshukla wrote 2 weeks ago: मयूरपिच्छमुकुटा वनमालाविभूषिता। मूर्तिर्मायापते! दृग्भ्याम् … more →
balramshukla wrote 3 weeks ago: सत्पक्षपातिनो हंसा! नूनं नालीकवल्लभाः!। गुणं गृह्णीत मा दोषं नीरक्षीरविवेकिनः!॥ … more →
jayantijain wrote 5 months ago: हमारा सबसे बड़ा सहायक कौन है? अस्तित्व कहो या परमात्मा से बढ़कर हमारा कोई सहायक धरती पर नहीं है। इस ई … more →
Nishant wrote 5 months ago: एक फ़कीर किसी गाँव से गुज़र रहा था. रास्ते में उसे एक औरत मिली जिसने उसे बताया कि उसका बेटा बहुत बीम … more →
रवि कुमार, रावतभाटा wrote 7 months ago: प्रार्थना के शिल्प में नहीं – देवी प्रसाद मिश्र ( a kavita poster by ravi kumar, rawatbhata) श … more →
Praful wrote 8 months ago: आपको और आपके पुरे परिवार को राम नवमी के शुभ अवसर पर बहुत-बहुत शुभकामनाये | मर्यादा पुरुषोतम भगवान श् … more →
डा. अमर कुमार wrote 8 months ago: मैं भी तो अल्पज्ञ जीव मात्र ही हूं : श्री बिस्मिल की इस स्वीकारोक्ति में मेरी असहमति का कोई स्थान … more →
योगेन्द्र जोशी wrote 11 months ago: वर्ष २००९ का आगमन हो चुका है । पिछले वर्ष सारा विश्व आर्थिक मंदी से जूझता रहा, तो अपना देश उसके साथ … more →
विनय wrote 2 years ago: इक मौक़ा दो तुम मुझे कि बता सकूँ कितना टूटकर प्यार करता हूँ तुमसे तुम्हें जो चाहिए सब दूँगा मैं प्यार … more →