प्रियंकर की एक कविता कृतज्ञ हूं मैं कृतज्ञ हूं मैं जैसे आसमान की कृतज्ञ है पृथ्वी जैसे पृथ्वी का कृतज्ञ है किसान कृतज्ञ हूं मैं जैसे सागर का कृतज्ञ है बादल जैसे नए जीवन के लिए बादल का आभारी है नन्हा… more →
अनहद नादPRIYANKAR wrote 1 week ago: प्रियंकर की एक कविता कृतज्ञ हूं मैं कृतज्ञ हूं मैं जैसे आसमान की कृतज्ञ है पृथ्वी जैसे पृथ्वी का क … more →
PRIYANKAR wrote 2 years ago: प्रियंकर की एक अपेक्षाकृत ताज़ा कविता अटपटा छंद भारतवर्ष उदय भारतीयता अस्त रोयां-रोयां कर्जजाल … more →
PRIYANKAR wrote 2 years ago: प्रियंकर की एक कविता वृष्टि-छाया प्रदेश का कवि मैं हाशिये का कवि हूं मेरी आत्मा के राग का आ … more →
PRIYANKAR wrote 2 years ago: इक्कीसवीं सदी की रथयात्रा भेड़िये अब धम्मम् शरणम् गच्छामि का जाप करते हुए नगर के प्रवेशद्वार तक आ … more →
PRIYANKAR wrote 2 years ago: तुम मेरे मन का कुतुबनुमा हो भले किसी और की हो जाएं ये गहरी काली आंखें वे सितारे मेरी स्मृति क … more →
PRIYANKAR wrote 2 years ago: सबसे बुरा दिन सबसे बुरा दिन वह होगा जब कई प्रकाशवर्ष दूर से सूरज भेज देगा ‘लाइट’ क … more →
PRIYANKAR wrote 2 years ago: प्रियंकर की एक कविता प्रतीत्य समुत्पाद भाषा चाहिए , संस्कृति नहीं पूंजी चाहिए , संस्कृति न … more →