वाजिदअली शाह का समय था। लखनऊ विलासिता के रंग में डूबा हुआ था। छोटे-बड़े, अमीर-गरीब, सभी विलासिता में डूबे हुए थे। कोई नृत्य और गान की मजलिस सजाता था , तो कोई अफीम की पीनक ही के मजे लेता था। जीवन के प्… more →
चौपालNishant wrote 2 months ago: हिंदी के महानतम कथाकार प्रेमचंद का जीवन अत्यंत सादगीपूर्ण था. उनके पास एक पुराना कोट था जो फट गया था … more →
रवि कुमार, रावतभाटा wrote 7 months ago: लमही के लम्हे (photographs of lamahee by ravi kumar, rawatbhata) गत १४ अप्रेल को बनारस प्रवास के दौर … more →
Satish Chandra satyarthi wrote 1 year ago: वाजिदअली शाह का समय था। लखनऊ विलासिता के रंग में डूबा हुआ था। छोटे-बड़े, अमीर-गरीब, सभी विलासिता में … more →
Satish Chandra satyarthi wrote 1 year ago: हल्कू ने आकर स्त्री से कहा– सहना आया है । लाओं, जो रुपये रखे हैं, उसे दे दूँ, किसी तरह गला तो … more →
Satish Chandra satyarthi wrote 1 year ago: 1 जुम्मन शेख अलगू चौधरी में गाढ़ी मित्रता थी। साझे में खेती होती थी। कुछ लेन-देन में भी साझा था। एक … more →
संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 1 year ago: जन्म-प्रेमचन्द का जन्म ३१ जुलाई सन् १८८० को बनारस शहर से चार मील दूर समही गाँव में हुआ था। आपके पिता … more →
संपादक- मिथिलेश वामनकर wrote 1 year ago: इधर हिन्दी में नारी-विमर्श की बडी चर्चा है। इस चर्चा में पुरुष और नारी दोनों शामिल हैं। कुछ पत्रिक … more →