उस्लूब*, उस्लूब, उस्लूब क्या पढ़ने वाले इनको समझते हैं वज़नी हो सीने पर गर ज़ख़्म उसे पढ़ने वाले दर्द को समझते हैं * लेखन के नियम अथवा शैली शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़र’ लेखन वर्ष: २००३ … more →
तख़लीक़-ए-नज़रNishant wrote 1 week ago: संत मैक्सिमिलियन कोल्बे (1894-1941) पोलैंड के फ्रांसिस्कन मत के पादरी थे. नाजी हुकूमत के दौरान उन्हे … more →
sonyagee wrote 3 months ago: हर क़दम संभल के रखो हर हरफ़ वज़न कर कहो लाइफ में कोई यू- टर्न नही है ….. हर रिश्ता खुल के जियो … more →
दरभंगिया wrote 3 months ago: मिटती नहीं है याद से जब कहीं दूर अपने घरौंदों से मिले थे उन्मुक्त भाव से ठंडी सड़क पर तीखी हवाओं के ब … more →
दरभंगिया wrote 4 months ago: सुबह की अलसाई बेला में जब अंगडाई लेती तुम प्रिये न पूछ कहाँ किधर कैसे उठती है एक टीस प्रिये. रात नही … more →
प्रेमलता पांडे wrote 4 months ago: ’प्यार की बात न हो तो अच्छा है, बिन बात ही प्यार होतो सच्चा है। प्यार की बात का तो अर्थ होता है, प् … more →
दरभंगिया wrote 5 months ago: तेरे नयना ऐसे सजना जो ले जाते मेरे चैना जो ना दिखे तो दिल घबराए साँस रुके जब सामने आए ऐसा क्यों हैं … more →
sareetha wrote 5 months ago: दुनिया में आज तक सच्ची प्रेम कहानियों का दारुण अंत देखा गया है । लेकिन हाल ही में नये दौर के हीर -र … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: कमेन्ट पाने का उसने कीर्तिमान बनाया जोश में आकर उसने लिखा अपनी प्रेयसी को प्रेम पत्र इकतरफा प्रेम ने … more →
विनय wrote 9 months ago: उस्लूब*, उस्लूब, उस्लूब क्या पढ़ने वाले इनको समझते हैं वज़नी हो सीने पर गर ज़ख़्म उसे पढ़ने वाले दर्द … more →
विनय wrote 9 months ago: हम सब के सच्चे दोस्त हैं हर दिल की बात समझते हैं उसकी ख़ुशी को हम अपने ख़ुशी के आँसुओं में रखते हैं … more →
विनय wrote 9 months ago: धीरे-धीरे ग़म सहना, किसी से कुछ न कहना फ़ितरत ऐसी हो गयी, दिन-रात मरके जीना शायिर: विनय प्रजापति ‘नज़ … more →
विनय wrote 9 months ago: आज फिर मुझको खिड़की से दिख रहा है चाँद आधा-आधा जिस तरह से मैं जी रहा हूँ वो भी कहीं जी रहा है आधा-आध … more →
pryas wrote 10 months ago: एक संत ने एक रात स्वप्न देखा कि उनके पास एक देवदूत आया है। देवदूत के हाथ में एक सूची है। उसने कहा, … more →
विनय wrote 1 year ago: मेरी प्रिय मेरी प्रियतमा मेरी प्रेयसी मैं तुमको सच्चे मन से प्रेम करता हूँ निर्मल निश्छल सच्चा प्रेम … more →
विनय wrote 1 year ago: जब साँसों में समायी नयी सुगन्ध जब मिले पत्तों को लाल-हरे रंग जब आया जीवन में मेरे बसंत जब तन-मन में … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: प्रेम पाशमय जीवन सुना कर जाने के बाद महक उठी नन्हीं बगिया में प्रिये तुम्हारी याद झिलमिल स्मृति च … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: प्रेम और युद्ध में सब जायज है। क्या इस तर्क को सही मान लिया जाये? पूरी तरह यथार्थ मीवन जीने वाले लोग … more →