‘कहाँ गायब थे मंगरू?’-किसी ने चुपके से पूछा। वे बोले- यार, गुमनामियाँ जाहिल मिनिस्टर था। बताया काम अपने महकमे का तानकर सीना- कि मक्खी हाँकता था सबके छोए के कनस्टर का। सदा रखते हैं करके नोट… more →
कारवाँ गुज़र गया, गुबार देखते रहे!Rewa Smriti wrote 1 year ago: ‘कहाँ गायब थे मंगरू?’-किसी ने चुपके से पूछा। वे बोले- यार, गुमनामियाँ जाहिल मिनिस्टर था। … more →