Blogs about: फुटकर कलाम
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कैसी फ़रियाद कैसा नाला
कैसी फ़रियाद, कैसा नाला हम क़ैसो-फ़रहाद नहीं हम हैं ख़ुदा से, ख़ुदा हमसे सिवाय इस… more »
तख़लीक़-ए-नज़र
कैसी फ़रियाद कैसा नाला
विनय प्रजापति wrote 1 month ago: कैसी फ़रियाद, कैसा नाला हम क़ैसो-फ़रहाद न … more »
इश्क़ क्या हमको मारेगा
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: इश्क़ क्या हमको मारेगा, हम इश्क़ को मारे … more »
ज़ख़्मे-जिगर भर आये, कहाँ हो तुम?
विनय प्रजापति wrote 1 month ago: ज़ख़्मे-जिगर भर आये, कहाँ हो तुम? बदरा सा … more »
ख़ुशबू तेरी मेरे बदन से जाती नहीं
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: ख़ुशबू तेरी मेरे बदन से जाती नहीं पैग़ … more »
ख़राश ज़ख़्म बनेगी, घाव करेगी
विनय प्रजापति wrote 1 month ago: ख़राश ज़ख़्म बनेगी, घाव करेगी और मवाद क … more »
शबनमी सर्द रात है और ख़्याल तेरा
विनय प्रजापति wrote 1 month ago: शबनमी सर्द रात है और ख़्याल तेरा चाँद … more »
दरवाज़े पे चुप-चुप से वह बैठे हैं
विनय प्रजापति wrote 1 month ago: दरवाज़े पे चुप-चुप से वह बैठे हैं दबा के … more »
हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों से
विनय प्रजापति wrote 1 month ago: हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों स … more »
उम्मीद जागी है इक बार फिर तुम्हें पाने की
विनय प्रजापति wrote 1 month ago: उम्मीद जागी है इक बार फिर तुम्हें पाने … more »
कभी यूँ भी होता है
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: कभी यूँ भी होता है ज़िन्दगी मिलती है खो … more »
सदियाँ कटता रहूँगा
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: सदियाँ कटता रहूँगा वक़्त गुज़ारता रहूँ … more »
जो जन शाइरी का फ़न समझते होंगे
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: जो जन शाइरी का फ़न समझते होंगे हम को शाइ … more »
हमारी दोस्ती बहुत गहरी थी
विनय प्रजापति wrote 1 month ago: हमारी दोस्ती बहुत गहरी थी जिसको लोहा क … more »
जब भी तेरा नाम लेती हैं
विनय प्रजापति wrote 1 month ago: जब भी तेरा नाम लेती हैं बहुत ख़ुश होती … more »
एक मैं ही था शहंशाह सारे जहाँ का
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: एक मैं ही था शहंशाह सारे जहाँ का जब तलक … more »
कुछ यूँ क़त्ल हुआ यह वक़्त
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: कुछ यूँ क़त्ल हुआ यह वक़्त कि क़तराए-ख़ूँ … more »
'नज़र' वह हस्ती'
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: ‘नज़र’ वह हस्ती’ उदू उसका’ उसका न … more »
जब जीना लाज़मी हो जाये
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: जब जीना लाज़मी हो जाये तो सबको सभी को मि … more »
मैंने आँखों को लहू का समन्दर
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: मैंने आँखों को लहू का समन्दर और दिल को … more »
