Blogs about: फुटकर कलाम

कैसी फ़रियाद कैसा नाला

विनय wrote 1 year ago: कैसी फ़रियाद, कैसा नाला हम क़ैसो-फ़रहाद नहीं हम हैं ख़ुदा से, ख़ुदा हमसे सिवाय इसके कुछ याद नहीं शायिर: … more →

Tags: रुबाइयाँ, इश्क़, Love, प्यार, याद, मोहब्बत, ख़ुदा, क़ैस, Memory

इश्क़ क्या हमको मारेगा4 comments

विनय wrote 1 year ago: इश्क़ क्या हमको मारेगा, हम इश्क़ को मारेंगे अब तलक क्या हारे हैं उससे, जो अब हारेंगे जाओ कह दो शायरे-म … more →

Tags: रुबाइयाँ, इश्क़, प्यार, मुक़ाबिल, मैदाँ, मोहब्ब्त, लहू, शायर, शेर

ज़ख़्मे-जिगर भर आये, कहाँ हो तुम?

विनय wrote 1 year ago: ज़ख़्मे-जिगर भर आये, कहाँ हो तुम? बदरा सावन बुलाये, कहाँ हो तुम? अपने हश्र तक पहुँचा ‘नज़र … more →

Tags: रुबाइयाँ, इश्क़, Heart, Love, सावन, प्यार, मोहब्बत, नज़र, death

ख़ुशबू तेरी मेरे बदन से जाती नहीं5 comments

विनय wrote 1 year ago: ख़ुशबू तेरी मेरे बदन से जाती नहीं पैग़ामे-मोहब्बत चिठ्ठियाँ लाती नहीं तुम क्या जानो बेक़रारी मेरी प्य … more →

Tags: रुबाइयाँ, इश्क़, ख़ुशबू, चिठ्ठी, पैग़ाम, प्यार, बदन, बेक़रारी, मोहब्बत

ख़राश ज़ख़्म बनेगी, घाव करेगी

विनय wrote 1 year ago: ख़राश ज़ख़्म बनेगी, घाव करेगी और मवाद के दरिये बहेंगे हमने हमेशा ‘वफ़ा’ से लाग रखा एक दिन … more →

Tags: रुबाइयाँ, इश्क़, Love, प्यार, मोहब्बत, वफ़ा, ज़ख़्म, घाव, scar

शबनमी सर्द रात है और ख़्याल तेरा

विनय wrote 1 year ago: शबनमी सर्द रात है और ख़्याल तेरा चाँद तन्हा मैं तन्हा और ख़्याल तेरा सबसे छुपाया पर छुपा न राज़े-मोहब … more →

Tags: रुबाइयाँ, Alone, इश्क़, ख़्याल, चाँद, छुपा, छेड़छाड़, तन्हा, दोस्त

दरवाज़े पे चुप-चुप से वह बैठे हैं

विनय wrote 1 year ago: दरवाज़े पे चुप-चुप से वह बैठे हैं दबा के मेरे जैसे तन्हाई वह बैठे हैं उनके दीदार से जो मुझे सुकून है … more →

Tags: रुबाइयाँ, इश्क़, Heart, Love, तन्हाई, दिल, प्यार, मोहब्बत, दरवाज़े

हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों से

विनय wrote 1 year ago: हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों से अब बात नहीं बनती है तेरी यादों से बोल तुझे इक हर्फ़ में कैसे … more →

Tags: रुबाइयाँ, आँखें, आँसू, इश्क़, तस्वीर, प्यार, बात, बोल, मोहब्बत

उम्मीद जागी है इक बार फिर तुम्हें पाने की

विनय wrote 1 year ago: उम्मीद जागी है इक बार फिर तुम्हें पाने की बचाये ख़ुदा! नज़र न लग जाये ज़माने की तेरी जुस्त-जू को न मिट … more →

Tags: रुबाइयाँ, वक़्त, उम्मीद, इश्क़, Love, time, प्यार, मोहब्बत, ख़ुदा

कभी यूँ भी होता है2 comments

विनय wrote 1 year ago: कभी यूँ भी होता है ज़िन्दगी मिलती है खो जाती है यह शाम उसकी यादों में मुझको डुबो जाती है नहीं यह मुमक … more →

Tags: रुबाइयाँ, ज़िन्दगी, इश्क़, Love, possible, प्यार, मोहब्बत, आँसू, Life

सदियाँ कटता रहूँगा1 comment

विनय wrote 1 year ago: सदियाँ कटता रहूँगा वक़्त गुज़ारता रहूँगा तुम जो हँसते रहो मैं भी हँसता रहूँगा.. शायिर: विनय प्रजापति ‘ … more →

Tags: रुबाइयाँ, वक़्त, इश्क़, Love, time, प्यार, मोहब्बत, Friendship, सदियाँ

जो जन शाइरी का फ़न समझते होंगे2 comments

विनय wrote 1 year ago: जो जन शाइरी का फ़न समझते होंगे हम को शाइर तो न समझते होंगे ‘विनय जी’ कैसे लिखते हैं आप ऐस … more →

Tags: रुबाइयाँ, तरक़ीब, Trick, Style, फ़न, शाइरी, Poetry, शायरी, शाइर

हमारी दोस्ती बहुत गहरी थी9 comments

विनय wrote 1 year ago: हमारी दोस्ती बहुत गहरी थी जिसको लोहा कहा गया था मगर जब उतरे बर्ग़े-बहार दोस्ताना मोर्चा खा गया था बर … more →

Tags: रुबाइयाँ, Friendship, बहार, spring, दोस्ती, leaves, दोस्ताना, लोहा, Iron

जब भी तेरा नाम लेती हैं

विनय wrote 1 year ago: जब भी तेरा नाम लेती हैं बहुत ख़ुश होती हैं आँखें मुस्कुराती हैं तेरे लबों से कहीं ज़्यादा हसीं होके … more →

Tags: रुबाइयाँ, इश्क़, Love, eyes, प्यार, नाम, मोहब्बत, ख़ुश, मुस्कुराहट

एक मैं ही था शहंशाह सारे जहाँ का

विनय wrote 1 year ago: एक मैं ही था शहंशाह सारे जहाँ का जब तलक साया था सर पे हुमा का मेरी शिकस्त ही तक़दीर हुई मेरी जब जाना … more →

Tags: रुबाइयाँ, जहाँ, तक़दीर, दर, शंहशाह, शिकस्त, साया, हुमा, Defeat

कुछ यूँ क़त्ल हुआ यह वक़्त

विनय wrote 1 year ago: कुछ यूँ क़त्ल हुआ यह वक़्त कि क़तराए-ख़ूँ तक न गिरा अबकि हारे तो टूट जाये ‘नज़र’ मेरे दिलसित … more →

Tags: रुबाइयाँ, इश्क़, दिलसिताँ, नाम, प्यार, मोहब्बत, वक़्त, क़तरा, क़त्ल

'नज़र' वह हस्ती'

विनय wrote 1 year ago: ‘नज़र’ वह हस्ती’ उदू उसका’ उसका नाम रटे जो लिख दे वह नाम दिल पर कभी न मिटे जी … more →

Tags: रुबाइयाँ, Tree, Heart, दिल, नाम, आँधी, दरख़्त, thunder, enemy

जब जीना लाज़मी हो जाये

विनय wrote 1 year ago: जब जीना लाज़मी हो जाये तो सबको सभी को मिटाके जियो क़द कभी छोटा न हो ‘नज़र’ सबको घुटनों पर झ … more →

Tags: रुबाइयाँ, Cruelty, Kill!, anger, knee, क्रोध, आक्रोश, लाज़मी, क़द

मैंने आँखों को लहू का समन्दर

विनय wrote 1 year ago: मैंने आँखों को लहू का समन्दर और दिल को दस्तो-सहरा बनाया ‘नज़र’ को अय्यार पेश सैय्याद बता … more →

Tags: रुबाइयाँ, Heart, दिल, समन्दर, सज़ा, Sea, desert, लहू, Blood+


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