प्रयोग की शक्ति प्रचार से अधिक है। प्रचार योजनाबद्ध और बोझिल होता है जबकि प्रयोग सरल और स्वतः होता है। हिंदी – आम-आदमी की भाषा है। अनपढ़ गंवार की भाषा है। पर जब उसे नामी लोग बोलते हैं तो हिंदी की… more →
पसंदप्रेमलता पांडे wrote 2 months ago: प्रयोग की शक्ति प्रचार से अधिक है। प्रचार योजनाबद्ध और बोझिल होता है जबकि प्रयोग सरल और स्वतः होता ह … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: कोई तरीका छूट न जाए नाम कमाने का। संसार का चलन उलटवांसी हो गया है। … more →
प्रेमलता पांडे wrote 4 months ago: यौं रहीम कैसे निभै, बेरे-केर कौ संग। वो डोलत रस आपनै, उनके फाटत अंग॥ साहित्य अगर बेर का वृक्ष है तो … more →
प्रेमलता पांडे wrote 6 months ago: पता नही क्या चल रहा है। अलग खिचड़ी पकाना तो पुराना मुहावरा है पर आज भी कारगर है। मुहावरे तो कई हैं जै … more →
प्रेमलता पांडे wrote 7 months ago: प्रजातंत्र में रोष क्यों? किसके ऊपर? अपनी बात अपने ऊपर थोपने जैसी है। नेता जनता है, जनता नेता है। सि … more →
प्रेमलता पांडे wrote 8 months ago: देश-प्रेम की बात करो मत, देश-प्रेम करके दिखलाओ! वीर वो ही नहीं जो आजादी के लिए लड़े, वीर वो भी हैं जो … more →
प्रेमलता पांडे wrote 8 months ago: नीर की बूंद, तारे शुष्क टेंटुआ, प्राण-आधार। जल ही जीवन है बार-बार कहने पर भी हम नहीं सुधरते। तुर्रा … more →
प्रेमलता पांडे wrote 8 months ago: बड़ा कठिन है चुनाव करना! … more →
प्रेमलता पांडे wrote 8 months ago: विकल्प हमें ही चुनना है। प्रकृति तो सदा ही सामंजस्य और समन्वय बैठाती रही है, पर हम अपनी घटिया हरकतों … more →
प्रेमलता पांडे wrote 8 months ago: - प्रधानजी/प्रधानाजी गुस्से में गाली दें तो ठीक है क्यों कि उनको प्रधानत्त्व के साथ-साथ विशेषाधिकार … more →
प्रेमलता पांडे wrote 8 months ago: कौन है गाँधीवादी? है कोई? पाश्चाताप के लिए ये कविता पढ़ें। … more →
प्रेमलता पांडे wrote 9 months ago: हमने होली पर कई जगह पहले भी लिखा है। यहाँ और वहाँ। पर आज मन उड़ चला उस चौराहे पर जहाँ आजकल शाम को सार … more →
प्रेमलता पांडे wrote 9 months ago: बुराई सबके लिए बुराई है फिर उसी राह पर चलना कहाँ की भलाई है। सामना करने की ताक़त समझ बढ़ाने और एकता बन … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 years ago: यह तो हम सब को सुनकर अमल करना ही पड़ेगा वरना !!! …परिणाम भी ना देख पाएँगे। … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 years ago: … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 years ago: तूफानों का साथ, गहरी काली रात, निर्भीक-शांत मन, पहुँचने का प्रण, यही है अभीष्ट अब, मंजिल मिलेगी कब? … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 years ago: अपने ग़म छिपाना कोई इनसे सीखे, काँटों का दर्द छिपाकर मुस्कराते दिखे। … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 years ago: सरल हृदय Originally uploaded by pandeypremlata. अबला कहकर अपमान ना हो, सबला कहकर अधिमान ना हो। … more →
प्रेमलता पांडे wrote 3 years ago: निसर्ग ऎसा भी देखा है… … more →