Blogs about: फोटोशॉप और मैं

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वो डोलत रस आपने उनके फाटत अंग!9 comments

प्रेमलता पांडे wrote 1 week ago: यौं रहीम कैसे निभै, बेरे-केर कौ संग। वो डोलत रस आपनै, उनके फाटत अंग॥ साहित्य अगर बेर का वृक्ष है तो … more →

Tags: कहानी/कथा, लोभ-लालच, व्यक्तित्व, मौलिकता, स्वाधीनता, व्यक्तिगत, साहित्य और ब्लॉग

उधर क्या चल रहा है?3 comments

प्रेमलता पांडे wrote 2 months ago: पता नही क्या चल रहा है। अलग खिचड़ी पकाना तो पुराना मुहावरा है पर आज भी कारगर है। मुहावरे तो कई हैं जै … more →

Tags: खिचड़ी पकाना

बेहूदगी!1 comment

प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: प्रजातंत्र में रोष क्यों? किसके ऊपर? अपनी बात अपने ऊपर थोपने जैसी है। नेता जनता है, जनता नेता है। … more →

Tags: जनता

प्रणाम!1 comment

प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: देश-प्रेम की बात करो मत, देश-प्रेम करके दिखलाओ! वीर वो ही नहीं जो आजादी के लिए लड़े, वीर वो भी हैं … more →

Tags: भावांजलि, विरासत, देश-प्रेम, भगत सिंह

प्राण-आधार1 comment

प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: नीर की बूंद, तारे शुष्क टेंटुआ, प्राण-आधार। जल ही जीवन है बार-बार कहने पर भी हम नहीं सुधरते। तुर्रा … more →

Tags: पर्यावरण, नीर की बूंद

समझ ही नहीं आता?7 comments

प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: बड़ा कठिन है चुनाव करना! … more →

Tags: चुनाव

आपकी मर्ज़ी?1 comment

प्रेमलता पांडे wrote 3 months ago: विकल्प हमें ही चुनना है। प्रकृति तो सदा ही सामंजस्य और समन्वय बैठाती रही है, पर हम अपनी घटिया हरकतों … more →

Tags: विरासत, पर्यावरण, मर्ज़ी, नुकसान, कुल्हाड़ी, पालन-पोषण

हम बड़े !!!2 comments

प्रेमलता पांडे wrote 4 months ago: - प्रधानजी/प्रधानाजी गुस्से में गाली दें तो ठीक है क्यों कि उनको प्रधानत्त्व के साथ-साथ विशेषाधिकार … more →

Tags: लेख/आलेख, बड़े

ग़म न करो1 comment

प्रेमलता पांडे wrote 4 months ago: कौन है गाँधीवादी? है कोई? पाश्चाता … more →

Tags: पाश्चाताप

मन जा बैठा वा चौराहे के बीच 5 comments

प्रेमलता पांडे wrote 4 months ago: हमने होली पर कई जगह पहले भी लिखा है। यहाँ और वहाँ। पर आज मन उड़ चला उस चौराहे पर जहाँ आजकल शाम को सा … more →

Tags: लेख/आलेख, संस्मरण, यादें

सोच लो5 comments

प्रेमलता पांडे wrote 4 months ago: बुराई सबके लिए बुराई है फिर उसी राह पर चलना कहाँ की भलाई है। सामना करने की ताक़त समझ बढ़ाने और एकता ब … more →

Tags: पतनशील रास्ते

प्रकृति की पुकार1 comment

प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: यह तो हम सब को सुनकर अमल करना ही पड़ेगा वरना !!! …परिणाम भी ना देख पाएँगे। … more →

राखी

प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: … more →

साहस2 comments

प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: तूफानों का साथ, गहरी काली रात, निर्भीक-शांत मन, पहुँचने का प्रण, यही है अभीष्ट अब, मंजिल मिलेगी कब? … more →

काँटों भरी ज़िंदगी

प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: अपने ग़म छिपाना कोई इनसे सीखे, काँटों का दर्द छिपाकर मुस्कराते दिखे। … more →

सरल हृदय1 comment

प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: सरल हृदय Originally uploaded by pandeypremlata. अबला कहकर अपमान ना हो, सबला कहकर अधिमान ना हो। … more →

निसर्ग1 comment

प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago: निसर्ग ऎसा भी देखा है… … more →

गुड़हल1 comment

प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago:   पक्के रंग बिखेरता है गुड़हल। … more →

कनेर3 comments

प्रेमलता पांडे wrote 2 years ago:  हवा महकाते हैं| … more →


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