Blogs about: बंजर
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खिली-खिली महकी बहारें हैं
खिली-खिली महकी बहारें हैं झीलों पर बहते शिकारें हैं ठण्डी-ठण्डी सौंधी हवाएँ … more »
तख़लीक़-ए-नज़र
खिली-खिली महकी बहारें हैं
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विनय प्रजापति wrote 1 week ago: खिली-खिली महकी बहारें हैं झीलों पर बहत … more »
नग़मे खिलने लगे हैं
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: नग़मे खिलने लगे हैं नज़्म महकने लगी है … more »
टूटे हुए चाँद को
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: टूटे हुए चाँद को सादे काग़ज़ में लपेटा … more »
न रखो वह तस्वीरें हरी जिनसे दिल दुखता हो
विनय प्रजापति wrote 4 months ago: न रखो वह तस्वीरें हरी जिनसे दिल दुखता … more »
रोज़े-शामे-दीवाली कोई नूरे-चराग़ नहीं
विनय प्रजापति wrote 4 months ago: रोज़े - शामे - दीवाली कोई नूरे - चराग़ न … more »
