अफ़लातून wrote 3 months ago: रुको कविता रुको समाज, सामाजिकता रुको रुको जन, रुको मन। रुको सोच सौंदर्य रुको ठीक इस क्षण इस पल इस वक … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 2 years ago: माना ये जग है सफर चार दिन का हम हैं मुसाफिर ये मेला छूटेगा जब होगा धमाका मौत छीन लेगी खाली हाथ जाते … more →