पिछली दो पोस्ट्स में मैने बचपन की कुछ बातें लिखी थीं..मसलन बचपन के टोटके और बचपन की तमन्नाएं। एक और चीज़ जिस पर मैं लिखना चाहता था वो थे..बचपन के डर और चिन्ताएं। पर लिखते लिखते रह गया। कारण यह, कि अगर … more →
इन्द्रधनुषNidhi KM wrote 2 days ago: एक कमरा सपनो भरा, फर्श मखमली, छत सितारों भरीं, दीवारें रंगों सजीं, खिड़कियाँ फूलों रंगीं, सपने कहीं … more →
Nishant wrote 1 month ago: डॉ. प्रवीण चोपड़ा के ब्लॉग पर इस पोस्ट में दिखाए गए स्लाइड-शो ने सभी पाठकों को भावुक कर दिया. मेरे ब … more →
Maheep Saraf wrote 4 months ago: जो सदाएँ सुनाई देती थी सागर की लहरों में वो गुम हो गई हे कहीं बमो की खबरों मे ढूंढ रहा हूँ वो बचपन, … more →
Rakesh wrote 1 year ago: An atheist professor of philosophy speaks to his class on the problem science has with God, The Almi … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: रंग-रंग के पंखों वाली, भागी-भागी, आती-जाती, फूलों पर और डाली-डाली। न तो पूछे, न तो बताती, क्या तू पि … more →
kmuskan wrote 1 year ago: आज बहुत दिनों बाद कुछ लिखने बैठी हूँ ।घर में तोड़ फोड़ ,साफ सफाई का काम हो रहा था ,इस कारण कंप्यूटर क … more →
kmuskan wrote 1 year ago: aaj achank hi yeh rachana mere samane aa gayi jise mene aase hi kitab me likhkar chod diya tha .aaj … more →
kmuskan wrote 1 year ago: इक औरत की िजंदगी गुजर जाती ह,ै मुिशकलो से जुझने मे कभी अपने हक के िलए तो, कभी अपने आसिततव के िलए कभी … more →
सागर नाहर wrote 1 year ago: कनेर के पीले लम्बे फूलों का मीठा रस चूसने का आनन्द आपने लिया कि नहीं? बचपन में हमारे खाने पीने की ची … more →
kmuskan wrote 1 year ago: िकतने अचछे थे बचपन के वो पल ना कोई िचंता, ना कोई काम बेिफकरी का था आलम हर वकत इधर- उधर खूब उधम मचाते … more →
Nitin Bagla wrote 1 year ago: पिछली दो पोस्ट्स में मैने बचपन की कुछ बातें लिखी थीं..मसलन बचपन के टोटके और बचपन की तमन्नाएं। एक और … more →
Nitin Bagla wrote 1 year ago: पिछली पोस्ट में बचपन के कुछ टोटकों/धारणाओं पर लिखा था जिन्हें अब याद करके भी हँसी आती है। टिप्पणियों … more →
Nitin Bagla wrote 1 year ago: मान्यता से मतलब संजूबाबा वाली मान्यता से ना लगाइयेगा। मैं बात कर रहा हूं छुटपन की अपने कुछ धारणाओं/व … more →
विनय wrote 1 year ago: ख़ामोश सदाओं से कोई बुलाये मुझको बड़े दिन हुए कोई रुलाये मुझको अपना अब कहूँ किसे कोई नहीं मेरा ख़ुशी … more →
kuldeepsingh wrote 1 year ago: लो याद आगई वो पहली कविता जो हमने बचपन मे पढी थी, याद आई आप को …………… … more →
kuldeepsingh wrote 1 year ago: लो याद आगई वो पहली कविता जो हमने बचपन मे पढी थी, याद आई आप को …………… … more →
Rakesh wrote 1 year ago: बातें करके रुला ना दीजिएगा… यू चुप रहके सज़ा ना दीजिएगा… ना दे सके ख़ुशी, तो ग़म ही सही … more →
Rakesh wrote 1 year ago: शिवांगी 2 साल की है। उसके दो बड़े भाई हैं जिनकी आयु लगभग पाँच और सात साल है। एक दिन उसकी मम्मी फॉन पर … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: शिवांगी तीन साल की है। उसके दो बड़े भाई हैं जिनकी आयु लगभग पाँच और सात साल है। एक दिन उसकी मम्मी फॉन … more →