कुछ क्षणिकाँएं लिखने की कोशिश की है. कृपया गलतीयाँ निकालें. स्कुल जाते बच्चे, घर बिठायी जाती बच्चियां. मस्जिदों में अजान, घर में फाके. स्कूलों में बंदूकें बंदूकों के स्कूल वजह इसकी? गलती किसकी? अक्लमं… more →
यह भी खूब रहीPraful wrote 2 months ago: जीवन में जब सब कुछ एक साथ और जल्दी – जल्दी करने की इच्छा होती है , सब कुछ तेजी से पा लेने की इ … more →
Satish Chandra satyarthi wrote 4 months ago: कुछ और रोचक तस्वीरें आप कल की पोस्ट में देख सकते हैं। The fun contd…… … more →
माधव त्रिपाठी wrote 8 months ago: हमेशा ही तो नही होता काम कभी थक जाता है इंसान रुक जाते हैं हाँथ दिमाग हो जाता है शांत कभी तो कलाकार … more →
विनय wrote 9 months ago: कुछ रिश्ते होते हैं बच्चों की होम-वर्क डायरी की तरह हमने ग़म को पहना है दिल पर किसी ज़ेवर की तरह शायि … more →
pryas wrote 10 months ago: कुछ क्षणिकाँएं लिखने की कोशिश की है. कृपया गलतीयाँ निकालें. स्कुल जाते बच्चे, घर बिठायी जाती बच्चिया … more →
Harihar Jha हरिहर झा wrote 1 year ago: नादान बच्चे पहन कर मुखौटा डराते फिरते है नहीं जानते वे उनके डराने की प्रवृत्ति भी एक तरह से भीतर का … more →