आकाश तारों से खिला है, चंद्रमा उसमें चला है, तू बटोही क्यों रुका है ? अपनी राह क्यों नहीं चला है ? रुककर खड़ा ना रह पाएगा, तूफ़ानों में घिर जाएगा। आँधियां उड़ा देती हैं, रुकने वाले को ज़बरन चला देती हैं। … more →
पसंदप्रेमलता पांडे wrote 3 years ago: आकाश तारों से खिला है, चंद्रमा उसमें चला है, तू बटोही क्यों रुका है ? अपनी राह क्यों नहीं चला है ? र … more →