बद्रीनारायण की एक कविता प्रशस्ति रक्ताभ अश्व पर तपते सूर्य के तिलक से आभूषित अग्नि का तरकस और ऊष्मा का तूणीर बांधे उपेक्षा के लौह शिरस्त्राण से आच्छादित समय के गर्भ से लहरों की तरह निकल … more →
PRIYANKAR wrote 1 year ago: बद्रीनारायण की एक कविता प्रशस्ति रक्ताभ अश्व पर तपते सूर्य के तिलक से आभूषित अग्नि का … more →
Tags: कविताएं/Poems
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