घर हवाओं में बना टिकता है क्या जो मुसाफ़िर हो कहीं रुकता है क्या हमने तुमको साँस में शामिल किया साँस लेने से कोई थकता है क्या है उसे भी शौक दिल से खेलना देखिये वो आप सा लगता है क्या हम तो यूँ ही मिल रह… more →
इक शायर अंजाना सा...Rohit Jain wrote 1 year ago: घर हवाओं में बना टिकता है क्या जो मुसाफ़िर हो कहीं रुकता है क्या हमने तुमको साँस में शामिल किया साँस … more →