बात पुरानी है. देवरिया के जी.आइ.सी में मैं नवीं में था. वार्षिक समारोह या जिला स्तरीय खेल कूद प्रतियोगिता थी जिसके दौरान काव्य अंत्याक्षरी जैसी प्रतियोगिता भी हुई थी. उसी में मैंने सुनी थी ये पंक्तिया… more →
एक आलसी का चिठ्ठाGirijesh Rao wrote 1 month ago: बात पुरानी है. देवरिया के जी.आइ.सी में मैं नवीं में था. वार्षिक समारोह या जिला स्तरीय खेल कूद प्रतिय … more →
विनय wrote 1 year ago: इक तरफ़ वह इक तरफ़ हम बीच में यह फ़ासले इश्क़ की डोर से हमने जो बाँधे बन्धन क्या ख़बर उन पर गींठ लगी भी … more →
विनय wrote 1 year ago: राहों में ढूँढ़ता हूँ कभी तुम मिलती नहीं यह भी सही जानो न जानो प्यार क्या है यह इक नशा-सा उतरता नहीं … more →