पहलू में मेरे फिर दिल-ए-बरबाद आया है वो शख्स आज फिर मुझे क्यों याद आया है हर राह पर करता फ़िरा ये प्यार की तलाश दिल जिस गली में भी गया नाशाद आया है देखो किसी भी शाख पर पंछी नहीं है आज लगता है फिर से बा… more →
इक शायर अंजाना सा...विनय wrote 1 year ago: वह जो मेरे ज़ख़्म गिनता है तो कहता है बस इतने ही! ख़िज़ाँ आयी बहार लौट गयी निशान रह गये इतने ही उसने न … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: पहलू में मेरे फिर दिल-ए-बरबाद आया है वो शख्स आज फिर मुझे क्यों याद आया है हर राह पर करता फ़िरा ये प्य … more →
विनय wrote 1 year ago: ‘नज़र’ वो नज़र जो लग जाये तो तबाह कर दे अपनी पे आये तो हर इक अदू को बरबाद कर दे उसका तैशो … more →