गोरी, आज यह सिंगार किसके लिए है गुलाबी अंगों में निखार किसके लिए है क्या सजन जी से मिलने का कोई वादा है कहो ना हमसे आज क्या इरादा है…! लटों की’ यह शरारत किसके लिए है दिन-रात इतनी चाहत किसक… more →
तख़लीक़-ए-नज़रSatish Chandra satyarthi wrote 10 months ago: यह भोजपुरी लोकगीत एक समय में बिहार के हर गाँव में बच्चे से लेकर बूढों तक के बीच में बहुत ही लोकप्रिय … more →
विनय wrote 1 year ago: गोरी, आज यह सिंगार किसके लिए है गुलाबी अंगों में निखार किसके लिए है क्या सजन जी से मिलने का कोई वादा … more →