रचना: नासिर काज़मी स्वर: बल्क़ीस ख़ानुम तेरे मिलने को बेकल हो गये हैं मगर ये लोग पागल हो गये हैं (बेकल == व्याकुल) बहारें लेके आये थे जहाँ तुम वो घर सुनसान जंगल हो गये हैं यहाँ तक बढ़ गये आलम-ए-हस्ती कि द… more →
निंदा पुराणअंकुर वर्मा wrote 1 year ago: रचना: नासिर काज़मी स्वर: बल्क़ीस ख़ानुम तेरे मिलने को बेकल हो गये हैं मगर ये लोग पागल हो गये हैं (बेकल … more →
अंकुर वर्मा wrote 1 year ago: रचना: परवीन शाक़िर स्वर: बल्क़ीस ख़ानुम गोरी करत सिंगार बाल बाल मोती चमकाये रोम रोम महकाये गोरी करत सिं … more →
अंकुर वर्मा wrote 1 year ago: स्वर: बल्क़ीस ख़ानुम कुछ दिन तो बसो मेरी आँखों में फिर ख़्वाब अगर हो जाओ तो क्या कोई रंग तो दो मेरे चेह … more →
अंकुर वर्मा wrote 1 year ago: स्वर: बलक़ीस ख़ानुम / टीना सानी अनोखा लाड़ला खेलन को माँगे चाँद रे अनोखा लाड़ला कैसी अनोखी बात रे अनोखा … more →