बसंत त्रिपाठी की एक कविता मैं एक ठहरे हुए पल में जी रहा हूं मैं एक ठहरे हुए पल में जी रहा हूं कवि हूं खादी पहनता हूं, बहस करता हूं फ़िल्में देखता हूं, शराब पीता हूं बचे समय में अपनी कारगुजारियो… more →
अनहद नादPRIYANKAR wrote 1 year ago: बसंत त्रिपाठी की एक कविता मैं एक ठहरे हुए पल में जी रहा हूं मैं एक ठहरे हुए पल में जी रहा हूं … more →