हम भी उन्मुक्त जी की तरह भारत के एक छोटे से कस्बे में रहने वाले एक आम भारतीए है। अपने कस्बे की गलियों में हम सालों से चप्पल चटका रहे है, हर मेहमान के संग खरीदो-फरोख्त करवा रहेे है और सड़कें नपवा रहे ह… more →
रत्ना की रसोईratna wrote 2 years ago: हम भी उन्मुक्त जी की तरह भारत के एक छोटे से कस्बे में रहने वाले एक आम भारतीए है। अपने कस्बे की गलियो … more →
ratna wrote 2 years ago: रत्ना की रसोई का वार्षिक स्थापना दिवस समारोह सम्पन्न हो चुका था। रत्ना जी पार्टी निपटा कर, स्वागतम् … more →
ratna wrote 2 years ago: ‘कोई दिवाना कहता है‘ एक युवा कवि-कृत, युवकों के लिए रचित, यौवन की भावनायों, … more →
ratna wrote 2 years ago: एक विडियो करीब सात महिने पहले हमने अपने चिट्ठे पर ‘शायर बेनाम‘ के नाम से लगायाा थ … more →
ratna wrote 2 years ago: मातृ दिवस के अवसर पर मुनव्वर राना साहिब की किताब “माँ” की समीक्षा लिखना चाह रही थी पर का … more →
ratna wrote 2 years ago: कल तीस अप्रैल है। हमारे लिए यह दिन बहुत खास है क्योंकि इस दिन हमने नारद संसार में पहला कदम रखा था। स … more →
ratna wrote 2 years ago: विपत्ति एंव दुश्वारी, तकलीफ और बिमारी कभी अकेले नहीं चलती। चले भी क्यूँ। आखिर उनकी जान-माल का सवाल ह … more →
ratna wrote 2 years ago: रत्ना की रसोई का चुल्हा पूरे तीन महिनों से ठंडा पड़ा था। भई क्यों ? वो हुया यूँ कि व्यस्तताओं का बोझ … more →
ratna wrote 2 years ago: बुद्धिजीवियों की यह खासियत है कि वे स्वंय को बहुत बुद्धिमान समझते है। जीवन की हर वास्तविकता को तर्क … more →
ratna wrote 2 years ago: सन् 2006 विदा ले रहा है और सन् 2007 बाहें पसारे हमें अपने आगोश में लेने को बेकरार है। फोन की घन्टिया … more →
ratna wrote 2 years ago: नई पीढ़ी पुरानी पीढ़ी से हमेशा एक कदम आगे रहती है। उदाहरण के तौर पर सत्युग के दिव्य-दृष्टि वाले संजय … more →
ratna wrote 3 years ago: पुरूष प्रकृति भंवरे के समान वांछित-अवांछित पर मंडराती ही रहती है इसीलिए पतिदेव जब एक खूबसूरत माडल को … more →
ratna wrote 3 years ago: नारी हूँ, इसलिए नारी-जीवन की विषमताओं को जानती हूँ और उसके मन की भावनाओं को पहचानती हूँ। शायद इसी का … more →
ratna wrote 3 years ago: “मैं इक फकीर के होंठों की मुस्कुराहट हूँ किसी से भी मेरी कीमत अदा नहीं होती “ जिनाब मुनव … more →
ratna wrote 3 years ago: ‘एक शाम काव्य-गोष्ट्ठीा के नाम‘ पोस्ट करते समय हमने वादा किया था कि अगले दिन आपकी मुलाका … more →
ratna wrote 3 years ago: पहले ब्लाग बनाना, फिर फोटू चिपकाना और फिर चलचित्र चलना- मेरे जैसे अल्प-ज्ञानी ब्लागर के लिए यह सफलता … more →
ratna wrote 3 years ago: काव्य-संध्या की एक झलक— शेष फिर– … more →
ratna wrote 3 years ago: कवि और कवियत्री के हमसफ़र का सफ़र काफी दुश्वार होता है। कवि महाराज़ रोज़ अपनी महारानी के गुणों का गु … more →
ratna wrote 3 years ago: सागर जी ने रुठी सजनी को मनाने का मार्ग सुझाया था। क्या ऐसा नहीं हो सकता कि सजनी कभी रुठे ही नहीं । ब … more →