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Blogs about: बस यूँ ही

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हिन्दी है हम वतन है हिन्दोस्तां हमारा11 comments

ratna wrote 2 years ago: हम भी उन्मुक्त जी की तरह भारत के एक छोटे से कस्बे में रहने वाले एक आम भारतीए है। अपने कस्बे की गलियो … more →

एक नया विवाद13 comments

ratna wrote 2 years ago: रत्ना की रसोई का वार्षिक स्थापना दिवस समारोह सम्पन्न हो चुका था। रत्ना जी पार्टी निपटा कर, स्वागतम् … more →

डाॅ विश्वास कुमार कृत कोई दिवाना कहता है--13 comments

ratna wrote 2 years ago:             ‘कोई दिवाना कहता है‘ एक युवा कवि-कृत, युवकों के लिए रचित, यौवन की भावनायों, … more →

डाक्टर कुमार विश्वास21 comments

ratna wrote 2 years ago:   एक विडियो करीब सात महिने पहले हमने अपने चिट्ठे पर ‘शायर बेनाम‘ के नाम से लगायाा थ … more →

माँ और मुनव्वर राना27 comments

ratna wrote 2 years ago: मातृ दिवस के अवसर पर मुनव्वर राना साहिब की किताब “माँ” की समीक्षा लिखना चाह रही थी पर का … more →

पार्टी में आपका स्वागत है29 comments

ratna wrote 2 years ago: कल तीस अप्रैल है। हमारे लिए यह दिन बहुत खास है क्योंकि इस दिन हमने नारद संसार में पहला कदम रखा था। स … more →

और नहीं बस और नहीं13 comments

ratna wrote 2 years ago: विपत्ति एंव दुश्वारी, तकलीफ और बिमारी कभी अकेले नहीं चलती। चले भी क्यूँ। आखिर उनकी जान-माल का सवाल ह … more →

हेल्थ-बुलेटिन13 comments

ratna wrote 2 years ago: रत्ना की रसोई का चुल्हा पूरे तीन महिनों से ठंडा पड़ा था। भई क्यों ? वो हुया यूँ कि व्यस्तताओं का बोझ … more →

कुम्भ मेला-तथ्य और भ्रान्तियां8 comments

ratna wrote 2 years ago: बुद्धिजीवियों की यह खासियत है कि वे स्वंय को बहुत बुद्धिमान समझते है। जीवन की हर वास्तविकता को तर्क … more →

नव वर्ष मंगलमय हो10 comments

ratna wrote 2 years ago: सन् 2006 विदा ले रहा है और सन् 2007 बाहें पसारे हमें अपने आगोश में लेने को बेकरार है। फोन की घन्टिया … more →

हम होगें कामयाब11 comments

ratna wrote 2 years ago: नई पीढ़ी पुरानी पीढ़ी से हमेशा एक कदम आगे रहती है। उदाहरण के तौर पर सत्युग के दिव्य-दृष्टि वाले संजय … more →

प्रेम का त्रिकोण9 comments

ratna wrote 3 years ago: पुरूष प्रकृति भंवरे के समान वांछित-अवांछित पर मंडराती ही रहती है इसीलिए पतिदेव जब एक खूबसूरत माडल को … more →

पग-पग कुआं, पग-पग खाई7 comments

ratna wrote 3 years ago: नारी हूँ, इसलिए नारी-जीवन की विषमताओं को जानती हूँ और उसके मन की भावनाओं को पहचानती हूँ। शायद इसी का … more →

मुनव्वर राना और शायरी24 comments

ratna wrote 3 years ago: “मैं इक फकीर के होंठों की मुस्कुराहट हूँ किसी से भी मेरी कीमत अदा नहीं होती “ जिनाब मुनव … more →

कबाड़ का जुगाड़11 comments

ratna wrote 3 years ago: ‘एक शाम काव्य-गोष्ट्ठीा के नाम‘ पोस्ट करते समय हमने वादा किया था कि अगले दिन आपकी मुलाका … more →

एक शाम मुनव्वर राना के नाम7 comments

ratna wrote 3 years ago: पहले ब्लाग बनाना, फिर फोटू चिपकाना और फिर चलचित्र चलना- मेरे जैसे अल्प-ज्ञानी ब्लागर के लिए यह सफलता … more →

पहली दर्शनीय सफलता

ratna wrote 3 years ago: काव्य-संध्या की एक झलक— शेष फिर– … more →

एक शाम काव्य-गोष्ठी के नाम13 comments

ratna wrote 3 years ago: कवि और कवियत्री के हमसफ़र का सफ़र काफी दुश्वार होता है। कवि महाराज़ रोज़ अपनी महारानी के गुणों का गु … more →

Man,Woman And Happiness7 comments

ratna wrote 3 years ago: सागर जी ने रुठी सजनी को मनाने का मार्ग सुझाया था। क्या ऐसा नहीं हो सकता कि सजनी कभी रुठे ही नहीं । ब … more →


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