Blogs about: बहार

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खिली-खिली महकी बहारें हैं3 comments

विनय प्रजापति wrote 5 days ago: खिली-खिली महकी बहारें हैं झीलों पर बहत … more »

Tags: मेरा गीत

यह दिन प्यार का दिन है

विनय प्रजापति wrote 1 month ago: बहुत ख़ूबसूरत प्यार का दिन है जिसे चाह … more »

Tags: मेरा गीत

तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन2 comments

विनय प्रजापति wrote 1 month ago: तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन तुम्ह … more »

Tags: मेरा गीत

आफ़ताबी मुस्कुराहट है माहताबी चेहरा4 comments

विनय प्रजापति wrote 1 month ago: आफ़ताबी मुस्कुराहट है माहताबी चेहरा च … more »

Tags: मेरा गीत

इक दिन तू चली जायेगी

विनय प्रजापति wrote 1 month ago: मेरी जान न कर मुझसे मोहब्बत इतनी कि इक … more »

Tags: मेरा गीत

हमारी दोस्ती बहुत गहरी थी

विनय प्रजापति wrote 1 month ago: हमारी दोस्ती बहुत गहरी थी जिसको लोहा क … more »

Tags: फुटकर कलाम

नग़मे खिलने लगे हैं

विनय प्रजापति wrote 1 month ago: नग़मे खिलने लगे हैं नज़्म महकने लगी है … more »

Tags: मेरा गीत

वह जो मेरे ज़ख़्म गिनता है

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: वह जो मेरे ज़ख़्म गिनता है तो कहता है बस … more »

Tags: मेरी ग़ज़ल

टूटे हुए चाँद को2 comments

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: टूटे हुए चाँद को सादे काग़ज़ में लपेटा … more »

Tags: मेरा गीत

दिल लगा बहार में, हाथ में आई खिज़ां

Rohit Jain wrote 2 months ago: दिल लगा बहार में, हाथ में आई खिज़ां इश्क़- … more »

Tags: मेरी गज़लें, 2007 A Poetic Journey, Oct 2007

कोई आता है ज़िन्दगी में

विनय प्रजापति wrote 2 months ago: कोई आता है ज़िन्दगी में, जैसे रोशनी जज़् … more »

Tags: मेरा गीत

आ री सखी चलें फिर वहीं

विनय प्रजापति wrote 3 months ago: आ री सखी चलें फिर वहीं जहाँ पहली बार मि … more »

Tags: मेरा गीत

कोई है इस दिल में

विनय प्रजापति wrote 3 months ago: कोई है इस दिल में पर साथ में नहीं है वह … more »

Tags: मेरा गीत

अब तेरा ही सपना है

विनय प्रजापति wrote 5 months ago: रात-दिन दुआओं में तुमको माँगता हूँ तुम … more »

Tags: मेरी ग़ज़ल

तुमको सबसे सच्ची दोस्ती मिले

विनय प्रजापति wrote 5 months ago: तुमको ज़िन्दगी की हर ख़ुशी मिले तेरे लब … more »

Tags: मेरी ग़ज़ल

ख़ाब में लम्स था सुम्बुल का

विनय प्रजापति wrote 5 months ago: ख़स्ताहाल है जो तेरा बीमार क्यों नहीं … more »

Tags: मेरी ग़ज़ल

दिल में तेरे लिए सच्ची अक़ीदत है

विनय प्रजापति wrote 7 months ago: है जो किसी से तुम्हें तो गुल से निस्बत … more »

Tags: मेरी ग़ज़ल

एक सफ़्हा

विनय प्रजापति wrote 8 months ago: सुबह एक सफ़्हा, शाम एक सफ़्हा दिन एक सफ़्ह … more »

Tags: मेरी नज़्म


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