दिल लगा बहार में, हाथ में आई खिज़ां इश्क़-ए-ख़ुदा की आस थी हो गया इश्क़-ए-बुतां इक वक़्त था के हर तरफ़ अपना ही वुजूद थ हाया इश्क़ क्या किया मिट गये नाम-ओ-निशां उफ़ वो जलवे हुस्न के उफ़ वो साये ज़ुल्फ़ के मुँह मे… more →
इक शायर अंजाना सा...विनय wrote 10 months ago: जो मुझे होता है वह दर्द तुझ तक पहुँचे यूँ इस ख़ला की यह गर्द तुझ तक पहुँचे की है इस दिल ने सदा तुझसे … more →
विनय wrote 1 year ago: ख़ुशबू बिछायी है राहों में तुम चले आओ, तुम चले आओ दिल बेक़रार है बहुत तुम चले आओ, तुम चले आओ मौसम बड़ … more →
विनय wrote 1 year ago: बहुत ख़ूबसूरत प्यार का दिन है जिसे चाहो दिल से, उसे पाने का दिन है रंग हैं चारों तरफ़, गुलाबों की ख़ु … more →
विनय wrote 1 year ago: हमारी दोस्ती बहुत गहरी थी जिसको लोहा कहा गया था मगर जब उतरे बर्ग़े-बहार दोस्ताना मोर्चा खा गया था बर … more →
विनय wrote 1 year ago: वह जो मेरे ज़ख़्म गिनता है तो कहता है बस इतने ही! ख़िज़ाँ आयी बहार लौट गयी निशान रह गये इतने ही उसने न … more →
Rohit Jain wrote 1 year ago: दिल लगा बहार में, हाथ में आई खिज़ां इश्क़-ए-ख़ुदा की आस थी हो गया इश्क़-ए-बुतां इक वक़्त था के हर तरफ़ अपन … more →
विनय wrote 1 year ago: कोई आता है ज़िन्दगी में, जैसे रोशनी जज़्बों का शौक़ के बाद क्यों कुछ कमी उसकी आँखें हमने देखी हैं नीली- … more →
विनय wrote 1 year ago: आ री सखी चलें फिर वहीं जहाँ पहली बार मिले थे जहाँ सपनों की गलियाँ छूटी थीं हक़ीक़त के दरवाज़े खुले थे च … more →
विनय wrote 1 year ago: कोई है इस दिल में पर साथ में नहीं है वह मेरा जाने-जिगर, वह मेरा हमसफ़र जिससे मिली थी नज़र वह कहाँ खो ग … more →
विनय wrote 1 year ago: तुमको ज़िन्दगी की हर ख़ुशी मिले तेरे लबों को मीठी-मीठी हँसी मिले हर दिन तुम्हें बहार का दिन हो कभी न … more →
विनय wrote 2 years ago: जिससे दुनिया ने हर चीज़ छीनी जिसे अपनी चाहत न मिली जिसके दरवाज़े पर खु़शी आकर लौट गयी जिसकी आँखों से न … more →