Blogs about: बादल
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रात चाँदनी का दरया हुई
रात चाँदनी का दरया हुई चल चाँद की कश्ती में दूर चलें बादलों के पीछे, तारों की … more »
तख़लीक़-ए-नज़र
रात चाँदनी का दरया हुई
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विनय प्रजापति wrote 3 weeks ago: रात चाँदनी का दरया हुई चल चाँद की कश्त … more »
उम्मीद है हम तुम मिलेंगे
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: उम्मीद है हम तुम मिलेंगे उम्मीद है नये … more »
तस्व्वुरे-हुस्नो-सादगिए-'शीना'
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: सुबह-सा चेहरा, माथे पर सूरज-सी बिन्दिय … more »
इक दिन तू चली जायेगी
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: मेरी जान न कर मुझसे मोहब्बत इतनी कि इक … more »
मेरी आँखों पर जो था
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: मेरी आँखों पर जो था तेरी ख़ुशबू का आँच … more »
फ़िराक़ को अजल विसाल को जीवन जाना
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: फ़िराक़ को अजल विसाल को जीवन जाना यह कि झ … more »
इस पुराने शहर में
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: इस पुराने शहर में कुछ पुरानी इमारतें ह … more »
माया यह तेरी कैसी माया है
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: शीतल जल में चंदन घुला हो ऐसी थी काया का … more »
हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: हल्के-हल्के आँसू टूटे हैं मेरी आँखों स … more »
दिल से पूछो
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: दिल से पूछो, इसकी मोहब्बत क्या है दिल ब … more »
कोई आता है ज़िन्दगी में
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: कोई आता है ज़िन्दगी में, जैसे रोशनी जज़् … more »
किस राह को चल रहे थे
विनय प्रजापति wrote 3 months ago: किस राह को चल रहे थे किस राह को हम चल दि … more »
जब-जब चाँद को
विनय प्रजापति wrote 3 months ago: जब-जब चाँद को छूना चाहा है मैंने बादलो … more »
शाम गहरी हो रही थी
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: शाम गहरी हो रही थी सुनहरा चाँद बादलों … more »
उल्टे सूरज की आग जम गयी
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: सोचा था दिन चढ़ेगा दोपहर तक तो सूरज की … more »
