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Ubuntu Kanpur Lucknowsanjay pandey wrote 2 weeks ago: एक बार फ़िर से बुन्देलखंड में सूखे जैसी नौबत की संभावना बन रही है। भीषण गर्मी में आमजन, पशु सब अकुला … more →
kmuskan wrote 9 months ago: ज़िंदगी की भाग-दोड में जाने वो पल कहाँ खो गए जब कुछ पल बैठ कर चैन से बतिया लिया करते थे एक चाए के प … more →
pryas wrote 10 months ago: कल ऑफिस के काम से बाहर जाना था. गार्ड को बोला की ड्राईवर को गाडी निकालने के लिये कह दे. कोई दो बजे ख … more →
oskanpur wrote 1 year ago: नवीनतम व आधुनिक लाइनक्स उबुँटू अप्रैल २००८ में आपके लिए पेश – मुफ्त में डाउनलोड करें व सबको ला … more →
विनय wrote 1 year ago: जैसे-तैसे निभाते हैं प्यार करके पछताते हैं सच्चे-झूठे सपने तेरे रातों की नींदें उड़ाते हैं दो किनारे … more →
विनय wrote 1 year ago: वह बारिश की छीटें वह बारिश की बूँदें फिर याद आने लगीं, ख़ामोशी तेरी आँखों की हलचल तेरे होंटों की फिर … more →
विनय wrote 1 year ago: यह दिल क्यूँ किसी का होना चाहे जाये जाँ, जाये क्यों न जान ही मगर यह दिल किसी का होना चाहे जबसे मेरी … more →
विनय wrote 1 year ago: जब साँसों में समायी नयी सुगन्ध जब मिले पत्तों को लाल-हरे रंग जब आया जीवन में मेरे बसंत जब तन-मन में … more →
विनय wrote 1 year ago: ऐ दिल वहाँ चल जहाँ रहते हैं वह उनके बिना कितने पल गुज़ारे हैं खोये-खोये सारे वह बीते नज़ारें हैं हाथों … more →
विनय wrote 1 year ago: आ तेरी आँखों के नीलम से यह चाँद-रात नीली कर दूँ पलकों पे रख लूँ कुछ ख़ाब तेरे अपने कर लूँ… खोन … more →
विनय wrote 1 year ago: शाम गहरी हो रही थी सुनहरा चाँद बादलों से झाँक रहा था छत पे था मैं और पुरवाई बह रही थी तेरा ख़्याल और … more →
विनय wrote 1 year ago: बारिश, बूँदें, पत्ते, मिट्टी -सौंधी रात, चाँद, तारे, निगाह -मेरी मरासिम लफ़्ज़ों से नहीं होते एहसास से … more →