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सादगी से कही बात किसी के समझ में नहीं आती-हिंदी शायरी1 comment

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: सादगी से कही बात किसी को समझ में नहीं आती है इसलिए शायद कुछ लोग श्रृंगार रस की चाशनी में डुबो कर सुन … more →

Tags: arebic, कविता, दीपक भारतदीप, मस्तराम, शेर-ओ-शायरी, हिन्दी, bharat, Deepak bharatdeep, hindi litreture

बाज़ार में बिकती है दवा और अमृत-हिंदी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: सादगी से कही बात किसी को समझ में नहीं आती है इसलिए शायद कुछ लोग श्रृंगार रस की चाशनी में डुबो कर सुन … more →

Tags: Anubhuti, arebic, Article, चिंतन, दीपक भारतदीप, मस्तराम, शब्द, शायरी, शेर-ओ-शायरी

बाज़ार में खौफ का अफ़साना-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: <strong>कुछ हकीकत कुछ ख्वाव बन जाता है  यूँ ही अफसाना सुर्खियों में बने रहें अख़बारों की  चर्च … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, मस्तराम, शब्द, Deepak bharatdeep, Enternment, Family, Friends

जो लोग अच्छे होते हैं दिखते नहीं हैं11 comments

विनय wrote 6 months ago: जो लोग अच्छे होते हैं दिखते नहीं हैं चाहने वाले बाज़ार में बिकते नहीं हैं ख़ुद से पराया ग़ैरों से अपन … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, वक़्त, चाह, दोस्त, लोग, Heart, time, दिल, याद

नफरत की आग 6 comments

kmuskan wrote 9 months ago: फ़िर से लग गई है दुकाने फ़िर से सज गए है बाज़ार दिल्ली फ़िर अपनी रफ़्तार से चल पड़ी है धमाके के मंजर को भू … more →

Tags: Zindagi, आग, घर, घाव, चोट, जवाब, ज़िन्दगी, जिस्म, नफरत

मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा

विनय wrote 1 year ago: मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा वह शामो-सहर ढूँढ़ता फिरा जिस बाज़ार में ग़म बिकते हों उसे दिनो-दोपहर ढूँढ … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, Heart, Love, दिल, प्यार, मोहब्बत, शाम, असर

थकने लगी है मोहब्बत की शाम

विनय wrote 1 year ago: थकने लगी है मोहब्बत की शाम सफ़र के राही को न मिला है मक़ाम बुझने लगी है मोहब्बत की रोशनी रात का राही ह … more →

Tags: मेरा गीत, चाँदनी, तूफ़ान, नफ़रत, बेवफ़ाई, बेग़ाने, मोहब्बत, मक़ाम, रात


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