मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा वह शामो-सहर ढूँढ़ता फिरा जिस बाज़ार में ग़म बिकते … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय प्रजापति wrote 5 months ago: मैं ज़हर का असर ढूँढ़ता फिरा वह शामो-सह … more →
विनय प्रजापति wrote 7 months ago: थकने लगी है मोहब्बत की शाम सफ़र के राही … more →