गोमती किनारे बादर कारे कारेबरस रहे भीग रहे तन और सड़क कनघहर गगन घन धो रहे धूल धनमहक रही माटी. बही चउआईसहेज रही गोरी केश कारे बहक लहक कपड़े कजरारे नयन धुनगुन चुन छुन छहरफहर बिखर शहर सररचहक उठे पनाले. ब… more →
वर्ड प्रेस पर आलसीPraful wrote 11 months ago: ग़ज़ा पट्टी में इसराइली सेना की ज़मीनी कार्रवाई लगातार तीसरे दिन भी जारी है और तेज़ होते संघर्ष में … more →
विनय wrote 1 year ago: तुमने हमसे हमको चुराया दिल में अपने हमको बसाया हम कुछ दीवाने हो गये हैं हाँ, दूर ख़ुद से हो गये हैं … more →
विनय wrote 1 year ago: नित उड़ता हूँ तेरी कजरारी अँखियों में मैं रंग-बिरंगे सपनों की छतरी लेके साँवले का मन लुभाके, बिजली ग … more →