गोमती किनारे बादर कारे कारे बरस रहे भीग रहे तन और सड़क कन घहर गगन घन धो रहे धूल धन महक रही माटी. बही चउआई सहेज रही गोरी केश कारे बहक लहक कपड़े कजरारे नयन धुन गुन चुन छुन छहर फहर बिखर शहर सरर चहक उठे प… more →
एक आलसी का चिठ्ठाGirijesh Rao wrote 1 month ago: गोमती किनारे बादर कारे कारे बरस रहे भीग रहे तन और सड़क कन घहर गगन घन धो रहे धूल धन महक रही माटी. बही … more →
Praful wrote 6 months ago: ग़ज़ा पट्टी में इसराइली सेना की ज़मीनी कार्रवाई लगातार तीसरे दिन भी जारी है और तेज़ होते संघर्ष में … more →
विनय wrote 1 year ago: तुमने हमसे हमको चुराया दिल में अपने हमको बसाया हम कुछ दीवाने हो गये हैं हाँ, दूर ख़ुद से हो गये हैं … more →
विनय wrote 1 year ago: नित उड़ता हूँ तेरी कजरारी अँखियों में मैं रंग-बिरंगे सपनों की छतरी लेके साँवले का मन लुभाके, बिजली ग … more →